पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सरदार परगट सिंह ने आम आदमी पार्टी की ओर से 2027 विधानसभा चुनाव के लिए जारी 40 उम्मीदवारों की पहली सूची पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आप के महिला सशक्तीकरण, ईमानदार राजनीति और पारदर्शिता के तमाम दावे टिकटों के बंटवारे में ही धराशायी हो गए हैं। सत्ता में आने से पहले बड़े-बड़े वादे करने वाली पार्टी अब अपने ही दावों पर खरी उतरने में नाकाम साबित हो रही है।
सरदार परगट सिंह ने कहा कि 40 उम्मीदवारों में सिर्फ चार महिलाओं को टिकट देना आप की महिला विरोधी सोच और महिला सम्मान के खोखले दावों को उजागर करता है। महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने और राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ाने की बातें करने वाली पार्टी ने टिकट वितरण के समय उन्हें हाशिये पर धकेल दिया। ‘आप’ बताए कि महिलाओं को उनका हक देने के उसके दावे आखिर टिकटों की सूची में कहां गायब हो गए?
उन्होंने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद संजीव अरोड़ा को लुधियाना पश्चिम से उम्मीदवार बनाना आप की कथित ईमानदार राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस पार्टी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर सत्ता हासिल की, वही आज गंभीर आरोपों और विवादों से घिरे नेता पर चुनावी दांव लगा रही है। आप नेतृत्व को पंजाब की जनता को बताना चाहिए कि आखिर ऐसे फैसले लेते समय उसके घोषित नैतिक मानदंड कहां चले जाते हैं?
परमिंदर सिंह झोटा की हत्या का विरोध झेल रही आम आदमी पार्टी पर परगट सिंह ने तंज कसा कि पार्टी मानसा सीट पर उम्मीदवार घोषित करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। दूसरी तरफ पंजाब आप के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा जैसे बड़े नेताओं के नाम पहली सूची से गायब हैं, जोकि पार्टी के भीतर चल रही असहज राजनीतिक परिस्थितियों की भी झलक देती है। इतना ही नहीं पटियाला शहरी सीट पर भी मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने करीबी माने जाने वाले मीडिया सलाहकार को टिकट नहीं दिला पाए। इस सीट से अजीत पाल सिंह को उम्मीदवार घोषित किया जाना बताता है कि टिकट वितरण में मुख्यमंत्री की पसंद कितनी प्रभावी रही।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सरदार परगट सिंह ने कहा कि आप की पहली सूची ने तीन बातें साफ कर दी हैं कि महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की उसकी नीयत नहीं है, ईमानदारी के उसके दावे सवालों से परे नहीं हैं और पार्टी के भीतर नेतृत्व व फैसले लेने की प्रक्रिया भी विवादों से घिरी हुई है। 2027 के चुनाव में आप को अपने वादों, अपने फैसलों और साढ़े चार साल के शासन का पूरा हिसाब देना होगा।

