कभी घुटनों और कूल्हों के दर्द की वजह से कुछ कदम चलना भी जिन मरीजों के लिए मुश्किल था, वही मरीज अब आत्मविश्वास के साथ डांस करते, रैंप वॉक करते और अपनी नई जिंदगी का जश्न मनाते नजर आए। यह खास मरीज संवाद कार्यक्रम प्रसिद्ध जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. अंकुर सिंघल द्वारा रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स में आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण (नी और हिप रिप्लेसमेंट) सर्जरी करा चुके मरीजों ने हिस्सा लिया और अपनी रिकवरी की कहानियां साझा कर अन्य मरीजों को प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान मरीजों ने डॉ. सिंघल के साथ डांस किया, फैशन वॉक में हिस्सा लिया और बताया कि कैसे सर्जरी के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
कई मरीजों ने बताया कि इलाज से पहले वे तेज दर्द और चलने-फिरने में दिक्कत की वजह से ठीक से चल नहीं पाते थे, सीढ़ियां नहीं चढ़ पाते थे और रोजमर्रा के काम भी खुद नहीं कर पाते थे। लेकिन अब वे गाड़ी चला रहे हैं, तैराकी कर रहे हैं, साइकिल चला रहे हैं, यात्रा कर रहे हैं और फिर से सक्रिय जीवन जी रहे हैं।
कार्यक्रम में एक मरीज ने कहा, “घुटनों के तेज दर्द की वजह से मैंने घर से निकलना लगभग बंद कर दिया था। आज मैं आराम से चल पा रहा हूं, सीढ़ियां चढ़ पा रहा हूं और फिर से आत्मविश्वास के साथ जिंदगी जी रहा हूं।”
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी बुजुर्ग मरीजों को फिर से आत्मनिर्भर बनाने और उनकी जीवन गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभा रही है। 80 वर्ष से अधिक उम्र के कई मरीजों ने सर्जरी के बाद दोबारा सामान्य और सक्रिय जीवन में लौटने का अनुभव साझा किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. अंकुर सिंघल ने कहा कि आज जॉइंट रिप्लेसमेंट केवल दर्द कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों की चलने-फिरने की क्षमता, आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सम्मान वापस दिलाने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि सही समय पर इलाज और उचित मेडिकल सलाह से बढ़ती उम्र में भी लोग सक्रिय और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
डॉ. सिंघल ने मरीजों को जॉइंट हेल्थ के प्रति जागरूक भी किया। उन्होंने व्यायाम, वजन नियंत्रण, लाइफस्टाइल में बदलाव और जोड़ों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने रिकवरी में फिजियोथेरेपी की अहम भूमिका पर जोर देते हुए अपनी रिहैबिलिटेशन टीम से भी परिचय कराया, जो सर्जरी से पहले और बाद में मरीजों की तेजी से रिकवरी में मदद करती है।
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के अनुसार, बदलती जीवनशैली, मोटापा, खेल के दौरान लगने वाली चोटें और लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदतों के कारण अब युवाओं में भी गठिया और जोड़ों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। जागरूकता और नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग से अब अधिक मरीज मिनिमली इनवेसिव और रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी को चुन रहे हैं।
डॉ. सिंघल ने बताया कि उन्होंने अपनी इनोवेटिव मिनिमल कट तकनीक से 10,000 से अधिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी और 1,000 से ज्यादा रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की हैं। उन्होंने कहा कि रोबोटिक सर्जरी से अधिक सटीकता, बेहतर जॉइंट बैलेंसिंग, कम टिश्यू डैमेज और तेजी से रिकवरी संभव हो रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि अब शुरुआती स्टेज के गठिया और सीमित जॉइंट डैमेज वाले मरीजों के लिए पार्टियल नी रिप्लेसमेंट जैसी नई तकनीकें बेहतर विकल्प बन रही हैं। इन प्रक्रियाओं में घुटने के स्वस्थ हिस्से को सुरक्षित रखा जाता है, जिससे मरीज जमीन पर बैठने, आराम से उठने-बैठने और भारतीय जीवनशैली से जुड़ी दैनिक गतिविधियां आसानी से कर पाते हैं।
डॉ. सिंघल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं और एडवांस ऑर्थोपेडिक केयर में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से प्रगति हुई है, जिससे अब मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज अपने राज्य में ही मिल रहा है।
कार्यक्रम का समापन फिजियोथेरेपी डेमोंस्ट्रेशन और मरीजों व मेडिकल टीम के उत्साहपूर्ण सेलिब्रेशन के साथ हुआ। यह आयोजन क्षेत्र में एडवांस जॉइंट रिप्लेसमेंट और रिहैबिलिटेशन सेवाओं के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

