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Tuesday, November 3, 2026
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42 साल बाद सिख नरसंहार के दर्द से रूबरू: चंडीगढ़ में भाजपा का ‘ज़ख्म 84 के’ सम्मेलन आज

भारतीय जनता पार्टी पंजाब की ओर से 1984 के सिख नरसंहार की वास्तविकता और पीड़ा से 42 साल बाद नई पीढ़ी को रूबरू कराने, पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए पिछले चार दशकों से जारी कानूनी लड़ाई और उनके पुनर्वास के संबंध में विचार-विमर्श करने के लिए कल 4 नवंबर, 2026 को ‘ज़ख्म 84 के’ शीर्षक के तहत एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चंडीगढ़ के सेक्टर-24 स्थित होटल पार्कव्यू में होगा।

सम्मेलन के प्रभारी एवं पार्टी के प्रदेश महासचिव रजनीश धीमान तथा स्टेट मीडिया हेड एवं कार्यक्रम को-ऑर्डिनेटर विनीत जोशी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सम्मेलन में 1984 के नरसंहार के पीड़ित, प्रत्यक्षदर्शी गवाह, कानूनी विशेषज्ञ, पूर्व न्यायाधीश, सामाजिक प्रतिनिधि और राजनीतिक नेता शामिल होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य नरसंहार से जुड़े तथ्यों से नई पीढ़ी को अवगत कराना, न्याय की लंबी लड़ाई के अनुभव साझा करना और पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए किए गए प्रयासों पर चर्चा करना है।

भाजपा नेताओं द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, सुबह 8:30 बजे पंजीकरण और नाश्ते के बाद सुबह 9:30 बजे पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों और पंजाब भाजपा प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया संयुक्त रूप से 1984 के सिख नरसंहार से संबंधित विशेष दस्तावेजी एवं फोटोग्राफिक प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इस प्रदर्शनी में नरसंहार की घटनाओं, साक्ष्यों और इस दौरान हुए मानवीय नुकसान को दर्शाया जाएगा।

सम्मेलन की संपूर्ण कार्यवाही भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सरदार आर.पी. सिंह द्वारा संचालित की जाएगी।

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों का विवरण

➖पहला सत्र: उद्घाटन समारोह (सुबह 10 से 11 बजे तक)

सम्मेलन की शुरुआत न्याय की प्राप्ति और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए अरदास के साथ होगी। इसके बाद पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों उद्घाटन भाषण देंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोकसभा सांसद रविशंकर प्रसाद मुख्य भाषण देंगे। उन्होंने 1984 के नरसंहार के पीड़ितों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण कानूनी मामलों की पैरवी की थी।

➖दूसरा सत्र: ‘सिख नरसंहार: कब और कैसे?’ (सुबह 11 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक)

इस सत्र में नरसंहार के प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और पीड़ितों के अनुभव सुने जाएंगे। इसमें सज्जन कुमार को सजा दिलाने वाले मामले की महत्वपूर्ण गवाह सरदारनी निरप्रीत कौर, सरदार जंगशेर सिंह, सरदारनी दर्शन कौर, अलवर से पीड़ित-गवाह सरदारनी सतपाल कौर और वीडियो संबोधन के माध्यम से शामिल होने वाली बीबी जगदीश कौर अपने विचार रखेंगी।

➖तीसरा सत्र: ‘क्या 1984 का सिख नरसंहार एक साजिश थी?’ (दोपहर 12:30 से 1:30 बजे तक)

इस सत्र में नरसंहार के पीछे सरकारी स्तर पर मिलीभगत और उच्चस्तरीय साजिश के पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसमें अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रत्यक्षदर्शी गवाह सरदार तरलोचन सिंह ऑनलाइन शामिल होंगे। इसके अलावा सांसद सरदार विक्रमजीत सिंह साहनी, जिन्होंने इस नरसंहार में अपने परिवार के पांच सदस्यों को खोया था, पूर्व वरिष्ठ रॉ अधिकारी एवं लेखक जी.बी.एस. सिद्धू विशेष वीडियो संदेश के माध्यम से और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के उपाध्यक्ष सरदार आत्मा सिंह लुबाना भी शामिल होंगे।

➖चौथा सत्र: ‘न्याय का कत्ल’ (दोपहर 2 से 3:15 बजे तक)

इस सत्र में नरसंहार के मामलों की जांच में हुई कथित अनियमितताओं, साक्ष्यों से छेड़छाड़, जांच की खामियों और न्याय की राह में आई संस्थागत बाधाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। इस चर्चा में जस्टिस एस.एन. ढींगरा (सेवानिवृत्त) शामिल होंगे, जिन्होंने 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1984 के बंद पड़े मामलों की दोबारा जांच के लिए गठित दो सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) का नेतृत्व किया था।
इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फूलका, जिन्होंने आरोपियों को सजा दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, और अधिवक्ता अशोक कश्यप, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान गठित जस्टिस नानावती आयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, अपने विचार रखेंगे।

➖पांचवां सत्र: ‘दोषियों को सजा दिलाने के प्रयास’ (दोपहर 3:15 से 4 बजे तक)

इस सत्र में 1984 के नरसंहार के दोषियों को सजा दिलाने के लिए की गई महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाइयों, मिली सफलताओं और पीड़ितों की सहायता के लिए किए गए प्रयासों पर चर्चा होगी। इसमें दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा और वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फूलका शामिल होंगे।

➖छठा एवं समापन सत्र: ‘भाजपा सरकारों द्वारा पुनर्वास के प्रयास’ (शाम 4 से 5 बजे तक)

अंतिम सत्र में भाजपा सरकारों द्वारा 1984 के पीड़ित परिवारों के कल्याण, राहत योजनाओं और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए की गई पहलों पर चर्चा की जाएगी। इस सत्र में हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, पंजाब भाजपा प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों और सांसद सरदार विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल होंगे।

इस पूरे सम्मेलन में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, सिख विद्वानों, नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और 1984 के नरसंहार के पीड़ित परिवारों के सदस्यों की बड़ी संख्या में भागीदारी होगी।

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