सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा में डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम को लेकर उठे विवाद के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने रीवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा खोलने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है। यह याचिका एनएसयूआई की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें मूल्यांकन प्रक्रिया की जांच और रीवैल्यूएशन विंडो फिर से शुरू करने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि अगर रीवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा खोला जाता है तो इसका असर करीब 17 लाख छात्रों पर पड़ सकता है। अदालत के मुताबिक, इस समय प्रक्रिया में बदलाव करने से मूल्यांकन व्यवस्था और कॉलेज एडमिशन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि अब तक 1.67 लाख से अधिक छात्र रीवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि नए आवेदन लेने से पहले से चल रही काउंसलिंग और आगे की शैक्षणिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
केंद्र ने अदालत में यह भी कहा कि पोर्टल दोबारा खोलने से रिजल्ट प्रक्रिया में देरी हो सकती है, जिसका असर विभिन्न संस्थानों में दाखिले पर पड़ेगा। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि किसी छात्र या अभिभावक को अपनी व्यक्तिगत शिकायत है तो वह अलग से अदालत का रुख कर सकता है।
इससे पहले सीबीएसई ने बताया था कि वेरिफिकेशन और रीवैल्यूएशन के लिए आवेदन विंडो 2 जून से 7 जून तक तय समय के अनुसार खुली रही। इस दौरान 1.6 लाख से ज्यादा छात्रों ने 3.8 लाख से अधिक आंसर बुक्स के लिए आवेदन किया।
सीबीएसई का कहना है कि पूरी प्रक्रिया तकनीकी एजेंसियों और विशेषज्ञ टीमों की निगरानी में पूरी की गई है।

