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Saturday, June 13, 2026
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मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आवास क्रांति : पहली कैबिनेट के फैसले से 10.60 लाख घर बने, धन्यवाद पत्र बना सुशासन का प्रतीक

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सामने आए दो पत्र इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। ये दोनों पत्र केवल सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि दो अलग-अलग राजनीतिक कार्यशैलियों और शासन की सोच को भी दर्शाते हैं। एक ओर वर्ष 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान आवास योजना के लिए संसाधनों की कमी को लेकर शिकायत का पत्र था, वहीं दूसरी ओर वर्तमान सरकार में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखा धन्यवाद पत्र है, जिसमें गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराने और भाजपा के चुनावी संकल्प को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना की गई है।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के तहत “मोर आवास-मोर अधिकार” का संकल्प लिया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इस वादे को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई। सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिससे वर्षों से अपने पक्के घर का इंतजार कर रहे लाखों गरीब परिवारों की उम्मीदों को नया आधार मिला।

पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व, स्पष्ट नीति और केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय के कारण राज्य में आवास निर्माण कार्य को अभूतपूर्व गति मिली। पिछले दो वर्षों के भीतर 10.60 लाख से अधिक आवासों का निर्माण पूरा किया गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है, जहां प्रधानमंत्री आवास योजना का प्रभावी और तेज गति से क्रियान्वयन हुआ है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पत्र केवल धन्यवाद ज्ञापन नहीं है, बल्कि सरकार के भीतर सामूहिक जिम्मेदारी, नेतृत्व के प्रति सम्मान और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता और समन्वित कार्यसंस्कृति को दर्शाता है।

इसके विपरीत, वर्ष 2022 में तत्कालीन पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिलने की शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि बार-बार अनुरोध के बावजूद धनराशि उपलब्ध नहीं होने से लगभग 8 लाख पात्र परिवार आवास से वंचित रह गए। उस समय यह मामला कांग्रेस सरकार के भीतर मतभेद और राजनीतिक खींचतान के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि पिछली सरकार के दौरान योजना के क्रियान्वयन में गंभीर बाधाएं थीं, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे प्राथमिकता देकर तेजी से आगे बढ़ाया है।

आज जब लाखों परिवारों को पक्का घर मिल रहा है, तब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लिए गए फैसलों और पहली कैबिनेट में 18 लाख आवासों की स्वीकृति को इस उपलब्धि की आधारशिला माना जा रहा है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री आवास योजना अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि मोदी की गारंटी और साय सरकार की प्रतिबद्धता को जमीन पर उतारने का उदाहरण बनकर उभरी है।

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