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Thursday, April 16, 2026
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सकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में 1.6 प्रतिशत की बढ़त

मुंबई : वैश्विक बाजारों में तेजी और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता फिर से शुरू होने की उम्मीदों के चलते भारतीय शेयर बाजार बुधवार को तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी, दोनों में 1.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,263.67 (1.63 प्रतिशत) अंकों की बढ़त के साथ 78,111.24 स्तर पर ट्रेड करते नजर आया, तो वहीं निफ्टी 388.65 अंक यानी 1.63 प्रतिशत चढ़कर 24,231.30 पर कारोबार करता नजर आया। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 77,981.10 पर खुलकर 78,270.42 का इंट्रा-डे हाई छुआ, तो वहीं निफ्टी 24,163.80 पर खुलकर 24,280.90 का हाई टच किया।
ब्रॉडर मार्केट में और ज्यादा तेजी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 में 2.20 प्रतिशत तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 2.35 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
वहीं, सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो बुधवार को सभी सेक्टर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। निफ्टी आईटी, मेटल्स, पीएसयू बैंक, मीडिया और रियल्टी सेक्टर में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। तो वहीं निफ्टी ऑटो, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।
निफ्टी 50 में 5 शेयरों को छोड़कर बाकी सभी में हरियाली देखने को मिली। इंडिगो, पावरग्रिड, इटरनल, मैक्स हेल्थ, विप्रो, एचडीएफसी लाइफ, टेक महिंद्रा, टीसीएस, हिंडाल्को, टीएमपीवी, एसबीआई लाइफ, एलएंडटी के शेयरों में 4 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि डॉ. रेड्डीज, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और ओएनजीसी के शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
जानकारों का कहना है कि अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिलने से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए वार्ता अगले दो दिनों में पाकिस्तान में फिर से शुरू हो सकती है, इससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना और निवेशकों ने बंपर खरीदारी की।
इस बीच, अमेरिकी-ईरान वार्ता के दूसरे दौर के बाद बेहतर होते बाजार भाव से रुपए में मजबूती आई और यह 93.50 पर पहुंच गया, जिसके चलते पिछले दो सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई।
एक विश्लेषक ने कहा, “कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, जो अब 94-95 डॉलर के दायरे की ओर फिसल रही है, भारत के आयात बिल पर दबाव कम कर रही है और रुपए को अल्पकालिक राहत प्रदान कर रही है।”

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