
Maharashtra News: ठाणे महानगरपालिका चुनाव को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। सत्तारूढ़ बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 32 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने पर विपक्ष ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने चुनाव प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाते हुए ‘नोटा’ विकल्प देने और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
राज्यभर में नगर निकाय चुनावों के दौरान कुल 68 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, जिनमें से 32 अकेले ठाणे जिले से हैं, जो कुल संख्या का करीब 47 प्रतिशत है। इन 32 उम्मीदवारों में बीजेपी के 20 और शिवसेना (शिंदे गुट) के 12 उम्मीदवार शामिल हैं। कल्याण क्षेत्र में बीजेपी के 14 और शिवसेना के छह उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जबकि ठाणे और भिवंडी में दोनों दलों के छह-छह उम्मीदवार विजयी घोषित किए गए हैं।
शिवसेना (उबाठा) की ठाणे इकाई के प्रमुख केदार दिघे ने इसे निकाय चुनाव के इतिहास में अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि केवल सत्तारूढ़ दलों के उम्मीदवारों का निर्विरोध जीतना संदेह पैदा करता है। उन्होंने मांग की कि भले ही किसी वार्ड में एक ही उम्मीदवार क्यों न हो, मतदाताओं को ‘नोटा’ का विकल्प मिलना चाहिए ताकि उनका लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रह सके।
मनसे ने भी इस पूरे मामले को अदालत में चुनौती देने के संकेत दिए हैं। पार्टी प्रवक्ता के मुताबिक, ठाणे-पालघर प्रमुख अविनाश जाधव ने इस संबंध में पार्टी अध्यक्ष राज ठाकरे को जानकारी दे दी है। वहीं ठाणे महानगरपालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन वार्डों में केवल एक उम्मीदवार था, उनके नाम अंतिम मंजूरी के लिए राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गए हैं। उधर, नवी मुंबई महानगरपालिका चुनाव में बीजेपी और शिवसेना आमने-सामने हैं, जहां कोई भी उम्मीदवार निर्विरोध नहीं चुना गया है।

