संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पहल के तहत वाराणसी की पवित्र धरती की मिट्टी को विशेष रूप से तैयार किए गए पवित्र कलशों के माध्यम से पंजाब के सभी जिलों तक पहुंचाया गया है।
यह पवित्र मिट्टी पंजाब के 622 मंडलों में ले जाकर लोगों तक संत गुरु रविदास जी का पवित्र संदेश पहुंचाया जा रहा है। यह अभियान किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं, बल्कि निरपेक्ष धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और मानवता का संदेश देने वाला अभियान है।
जात-पात का खंडन, सामाजिक समरसता, उच्च शिक्षा, अच्छे संस्कार एवं कर्म, न्याय और मानव समानता जैसे मूल्यों को निर्भीकता से बढ़ावा देने वाली संत गुरु रविदास जी की शिक्षाओं का ज्ञान जन-जन तक पहुंचाना ही इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है।
इस पवित्र अभियान के तहत एस. आर. लद्धड़ और डॉ. धर्मपाल वाराणसी पहुंचे, जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ योगी जी तथा संत निरंजन दास जी ने पवित्र मिट्टी से भरा कलश श्री एस. आर. लद्धड़ को सौंपा। श्री लद्धड़ इस पवित्र कलश को विशेष वाहन के माध्यम से पंजाब लेकर आए।
1 अगस्त को आर्य समाज मंदिर, सेक्टर-7, चंडीगढ़ में यह पवित्र कलश पंजाब भाजपा के अध्यक्ष श्री केवल सिंह ढिल्लों को विधिवत सौंपा गया। इसके बाद इस पवित्र मिट्टी को 36 पवित्र कलशों में विभाजित किया गया और पंजाब भाजपा के 36 जिला अध्यक्षों को सौंपा गया। इन कलशों के माध्यम से संत गुरु रविदास जी के पवित्र संदेश को पंजाब के प्रत्येक जिले तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है।

गुरु रविदास जी की बाणी मानवता का संदेश
संत गुरु रविदास जी ने अपने जीवन और पवित्र बाणी के माध्यम से समानता, मानवता, सामाजिक समरसता, भाईचारे और भेदभाव-मुक्त समाज का संदेश दिया। उनकी पवित्र बाणी का महत्वपूर्ण हिस्सा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में दर्ज है, जो उनके सार्वभौमिक और मानवतावादी संदेश की महानता को दर्शाता है।
श्री एस. आर. लद्धड़ ने कहा कि इन पवित्र कलशों का महत्व केवल इनमें रखी मिट्टी तक सीमित नहीं है। ये कलश संत गुरु रविदास जी की विचारधारा, उनकी पवित्र बाणी और सामाजिक समानता के संदेश के वाहक हैं। पंजाब के प्रत्येक जिले में इन कलशों के पहुंचने से समाज के सभी वर्गों को संत गुरु रविदास जी के आदर्शों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि संत गुरु रविदास जी ने ऐसे समाज की कल्पना की थी जिसमें किसी व्यक्ति के साथ जन्म, जाति या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न हो तथा प्रत्येक मनुष्य को सम्मान और समान अवसर प्राप्त हों। आज उनकी 650वीं जयंती के अवसर पर उनके इन विचारों को जन-जन तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वाराणसी की पवित्र मिट्टी से पंजाब के 36 जिलों तक पहुंचे ये 36 कलश केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि पंजाब की धरती पर संत गुरु रविदास जी के संदेश—मानवता, समानता और सामाजिक समरसता—को मजबूत करने का संकल्प हैं।
उन्होंने पंजाब के सभी जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं से अपील की कि इन पवित्र कलशों के माध्यम से संत गुरु रविदास जी के संदेश को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाया जाए तथा 650वीं जयंती के कार्यक्रमों को केवल समारोह तक सीमित न रखते हुए सेवा, शिक्षा, समानता और सामाजिक समरसता के जन-अभियान का रूप दिया जाए।
श्री लद्धड़ ने कहा कि संत गुरु रविदास जी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उनके विचारों में एक ऐसे समाज की कल्पना दिखाई देती है जहां कोई भूखा न रहे, कोई छोटा-बड़ा न हो और सभी लोग समान सम्मान के साथ रहें।

