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Thursday, May 14, 2026
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केरल की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है, हमें कई बदलाव करने होंगे: वी.डी सतीशन

तिरुवनंतपुरम । कांग्रेस हाईकमान द्वारा केरल का 13वां मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद वीडी सतीशन ने गुरुवार को कहा कि वह अपना मुख्यमंत्री पद केरल की जनता को समर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि हम एक मजबूत टीम बनाएंगे जो केरल के भविष्य के लिए काम करेगी। आईएएनएस से ​​बात करते हुए सतीशन ने कहा, “मुझे यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपने के लिए एआईसीसी नेताओं का मैं बहुत आभारी हूं। कांग्रेस नेतृत्व द्वारा निर्णय को अंतिम रूप देने में लगे समय के बारे में पूछे गए सवाल पर सतीशन ने कहा कि इस प्रक्रिया में व्यापक विचार-विमर्श शामिल था और इसे देरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि यह देरी थी। यह एक प्रक्रिया है। पहले मीडिया और सोशल मीडिया की इतनी गहन जांच-पड़ताल नहीं होती थी। कभी-कभी तो फर्जी खबरें भी फैल जाती हैं। नेतृत्व ने पूर्व पीसीसी अध्यक्षों, कार्यकारी समिति के सदस्यों, विधायकों और सांसदों से इस मामले पर चर्चा करने के बाद ही कोई निर्णय लिया।”


सतीशन ने राज्य के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हम एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं, क्योंकि केरल की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। हमें कई बदलाव करने होंगे। हमने काफी अध्ययन किया है, दस्तावेज तैयार किए हैं और विशेषज्ञों से चर्चा की है। भारत के इतिहास में यह पहली विपक्षी पार्टी है जिसने चुनाव से दो साल पहले ही अपनी तैयारी शुरू कर दी है।”
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, जो परामर्श के अंतिम दौर के दौरान दिल्ली में थे, को नेतृत्व के फैसले की जानकारी मिलने से पहले राहुल गांधी के साथ बैठक के लिए बुलाया गया था। वहीं, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला को राहुल गांधी ने बंद कमरे में फोन करके बताया कि दौड़ खत्म हो गई है और सतीशन को नेतृत्व के लिए मंजूरी मिल गई है।
सतीशन के लिए यह पदोन्नति एक उल्लेखनीय राजनीतिक उत्थान की पराकाष्ठा है, जो गुटबाजी की थकान और चुनावी असफलताओं के वर्षों के बाद केरल में कांग्रेस पार्टी द्वारा खुद को पुनर्जीवित करने के प्रयास को दर्शाती है।
कोच्चि जिले में जन्मे सतीशन ने अपनी राजनीतिक पहचान पर्दे के पीछे की गुटबाजी से नहीं, बल्कि विधानसभा में अथक प्रदर्शन और संगठनात्मक कार्य के माध्यम से बनाई। पेशे से वकील सतीशन ने पहली बार 2001 में परावुर विधानसभा सीट से चुनाव जीता और जल्द ही कांग्रेस के सबसे तेज-तर्रार और प्रभावशाली वक्ताओं में अपनी पहचान बना ली।
आंकड़ों, व्यंग्य और प्रभावशाली अंदाज से लैस वी.डी सतीशन वामपंथी खेमे के लिए लगातार चुनौती बने रहे। विडंबना यह रही कि उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता कांग्रेस के सबसे कठिन दौर में आई। 2021 के विधानसभा चुनावों में यूडीएफ की करारी हार के बाद सतीशन को अप्रत्याशित रूप से विपक्ष का नेता चुना गया। उस समय पार्टी के भीतर गुटबाजी के कारण कई लोगों ने उन्हें एक “समझौता उम्मीदवार” माना था लेकिन उन्होंने इस भूमिका को अपनी राजनीतिक ताकत बनाने का मंच बना दिया।
चाहे सोना तस्करी विवाद हो, एआई कैमरा आरोप हों या फिर पिनराई विजयन सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार हमले, सतीशन ने खुद को केरल में वाम विरोधी राजनीति के सबसे मुखर और आक्रामक चेहरे के रूप में स्थापित किया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के विपरीत सतीशन को कभी पार्टी के किसी एक गुट से पूरी तरह जुड़ा हुआ नहीं माना गया।

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