पंजाब की राजनीति में रविवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। आम आदमी पार्टी के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी नेतृत्व और भगवंत मान सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। दोनों विधायकों ने अरविंद केजरीवाल और विभव कुमार की भूमिका को लेकर भी निशाना साधा और पंजाब के मौजूदा राजनीतिक एवं प्रशासनिक हालात के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया।
दोनों विधायकों की ओर से उठाए गए मुद्दों ने आम आदमी पार्टी के भीतर नेतृत्व, जवाबदेही और पंजाब में सरकार के कामकाज को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे प्रमुख मुद्दा पंजाब को नशामुक्त और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने की चुनावी गारंटी का रहा। विधायकों ने सवाल उठाया कि सत्ता में आने के साढ़े चार साल से अधिक समय बीतने के बावजूद नशे और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पाया। उनका आरोप था कि पंजाब में चिट्टे की बिक्री, नशे की होम डिलीवरी और नशे के कारण परिवारों के उजड़ने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।
उन्होंने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। मानसा में 13-14 अक्टूबर को नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का हवाला देते हुए सरकार से कानून-व्यवस्था पर जवाब मांगा।
गैंगस्टरवाद और फिरौती की घटनाओं पर सवाल
विधायकों ने कहा कि पंजाब में चेन स्नैचिंग, फिरौती की कॉल, गैंगस्टरवाद और हत्याओं की घटनाओं ने आम नागरिकों और कारोबारियों में चिंता पैदा की है। उनका आरोप था कि अपराधियों में कानून का भय कम होता दिखाई दे रहा है। पुलिस थानों और एसएसपी कार्यालयों के आसपास हुई आपराधिक घटनाओं का भी जिक्र किया गया।
भ्रष्टाचार के मामलों में दोहरे मापदंड का आरोप
भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने तहसीलों, पुलिस थानों और सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी के आरोप लगाए। मंत्री विजय सिंगला, संजीव अरोड़ा और अन्य मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में एक समान मापदंड क्यों नहीं अपनाया जा रहा।
किसानों और कर्मचारियों से किए वादे अधूरे
किसानों के मुद्दे पर सभी फसलों पर एमएसपी की गारंटी, मक्का और मूंग की खरीद, यूरिया की उपलब्धता और किसान सम्मान निधि से जुड़े मुद्दे उठाए गए। विधायकों ने आरोप लगाया कि किसानों से किए गए कई चुनावी वादे अब तक पूरे नहीं हुए।
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने करीब 14,191 करोड़ रुपये के बकाये का जिक्र किया। छठे और सातवें वेतन आयोग के बकाये तथा कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के वादे पर भी सरकार से जवाब मांगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
विधायकों ने दावा किया कि पंजाब के करीब 2,400 स्कूल केवल एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं, जिनमें लगभग 77 हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। कॉलेजों में 1,531 प्रोफेसर पद और स्वास्थ्य विभाग में 1,098 पद खाली होने का मुद्दा भी उठाया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में डिस्पेंसरी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति, डॉक्टरों की कमी, आयुष्मान योजना और 16 मेडिकल कॉलेज बनाने के चुनावी वादे पर सवाल खड़े किए।
दलितों और बेअदबी के मामलों का भी किया जिक्र
दलित समुदाय से जुड़े मुद्दों में छात्रवृत्ति, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, दलित उपमुख्यमंत्री बनाने के चुनावी वादे और दलितों पर अत्याचार के मामलों को उठाया गया। इसके अलावा बेअदबी के मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के वादे को लेकर भी सरकार को घेरा गया।
दोनों विधायकों ने पार्टी नेतृत्व की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंजाब की जनता को चुनाव के दौरान दी गई गारंटियों का हिसाब मिलना चाहिए। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राज्य की राजनीति में दोनों विधायकों के अगले कदम और आम आदमी पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर निगाहें टिक गई हैं।

