उत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत तक मौसम ने ऐसा भयानक रूप अख्तियार किया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। शनिवार दोपहर राजस्थान के चार सीमावर्ती जिलों में पाकिस्तान से उठे एक विनाशकारी रेतीले तूफान (Sandstorm) ने दिन में ही रात जैसा अंधेरा ला दिया। वहीं, पिछले 24 से 48 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार में आए भीषण अंधड़, आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में अब तक 48 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। मौसम के इस जानलेवा यू-टर्न से आधा हिंदुस्तान सहम गया है। राजस्थान के मरुस्थलीय और उत्तर-पूर्वी जिलों में शनिवार दोपहर को प्रकृति का डरावना रूप देखने को मिला। चूरू, श्रीगंगानगर, बीकानेर और सीकर जिलों में अचानक धूल का एक ऐसा विशाल गुबार उठा, जिसने कई फीट ऊंची रेतीली दीवार का रूप ले लिया। तूफान का वेग इतना तीव्र (60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा) था कि देखते ही देखते चारों तरफ धूल छा गई और दृश्यता (Visibility) शून्य के करीब पहुंच गई। स्टेट हाईवे और शहरों में चल रहे वाहनों को दोपहर में ही हेडलाइट्स जलानी पड़ीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में लोग जान बचाने के लिए भागकर अपने घरों को बंद करते हुए नजर आ रहे हैं। चूरू के सरदारशहर और बीकानेर में घरों के अंदर तक रेत की मोटी परतें जम गईं। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा रेतीला बवंडर पहले कभी नहीं देखा। इससे पूर्व, शुक्रवार रात सीकर जिले के न्यू भागेगा रेलवे स्टेशन के पास आए तीव्र अंधड़ के कारण एक डबल डेकर मालगाड़ी के 4 खाली कंटेनर पटरी से नीचे ट्रैक पर गिर गए थे।
यूपी और बिहार में हाहाकार : मलबे और बिजली की चपेट में आने से 48 मौतें
एक तरफ जहां राजस्थान धूल के बवंडर से जूझ रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार में मौसम आफत बनकर बरसा है। दोनों राज्यों में पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर आ रही तीव्र आंधी, ओलावृष्टि और आसमानी बिजली (Lightning) के कारण अलग-अलग हादसों में 48 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। सबसे ज्यादा मौतें पेड़, दीवार और होर्डिंग्स गिरने तथा आकाशीय बिजली की चपेट में आने से हुई हैं। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भारी बारिश के बाद पहाड़ी दरकने से आए मलबे में कई गाड़ियां दब गईं। हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू और मंडी में भारी ओलावृष्टि के कारण सेब की तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे बागवानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब में भी ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है।
मौसम विभाग का बड़ा अपडेट : इस साल कमजोर रहेगा मानसून; देश में औसतन कम बारिश का अनुमान
इस मौसमी उथल-पुथल के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून को लेकर एक नया और चिंताजनक पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है और अब इसके अगले 7 दिनों में केरल के तट पर पहुंचने की संभावना है। अल-नीनो (El Nino) के बढ़ते प्रभाव के कारण इस साल देश में मानसूनी सीजन कमजोर रहने की आशंका है। इस साल जून से सितंबर के दौरान देश में औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जबकि भारत में सामान्य मानसूनी बारिश का औसत 87 सेंटीमीटर माना जाता है। मौसम विभाग ने साफ किया है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में भले ही सामान्य बारिश हो जाए, लेकिन देश के अन्य बड़े हिस्सों, विशेषकर वर्षा पर निर्भर खेती वाले मैदानी इलाकों (Rainfed Agriculture Areas) में मानसून बेहद कमजोर रह सकता है।
आगामी दो दिनों का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान
मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आगामी दो दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का यह हिंसक रूप जारी रहने की आशंका है। 31 मई को हिमाचल प्रदेश के 10 जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की चेतावनी जारी की गई है, जहाँ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ भीषण आंधी, आसमानी बिजली चमकने और ओलावृष्टि का अलर्ट है; यह दौर यहाँ 4 जून तक खिंच सकता है। इसी दिन उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी का अनुमान जताया गया है। इसके बाद, 1 जून को मौसम का सबसे खतरनाक रूप बिहार में देखने को मिल सकता है, जहाँ विभाग ने 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की विनाशकारी रफ्तार वाली आंधी चलने और बड़े पैमाने पर ओले गिरने का ‘ऑरेंज/रेड अलर्ट’ जारी किया है। वहीं, दक्षिण भारत के तमिलनाडु और उसके तटीय इलाकों में भी 31 मई से 1 जून के दौरान तेज मानसूनी हवाओं के साथ भारी बारिश का दौर लगातार जारी रहने की संभावना व्यक्त की गई है।
विशेष स्वास्थ्य सलाह (नौतपा)
मौसम वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि भले ही आंधी-बारिश से पारा गिरा हो, लेकिन नौतपा का असर अभी बाकी है। उमस बढ़ने से बच्चों और बुजुर्गों में हीट स्ट्रोक (लू) का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों को दोपहर में बाहर भेजने से बचें और उन्हें तरबूज का रस, आम पन्ना, नींबू पानी और बेल का शरबत जैसे घरेलू और प्राकृतिक पेय पदार्थ ही पिलाएं।

