सुप्रीम कोर्ट में त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई किरायों में भारी बढ़ोतरी को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में निजी एयरलाइंस के किराये और अतिरिक्त शुल्कों को नियंत्रित करने के लिए नए नियम बनाने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस टिकट के लिए इतनी अलग कीमतें क्यों वसूलती हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने उदाहरण देते हुए कहा कि कोई एयरलाइन 8000 रुपये किराया लेती है, जबकि दूसरी उसी रूट के लिए 18000 रुपये तक वसूलती है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि नए नियम बनने में कितना समय लगेगा। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2024 के भारतीय वायुयान अधिनियम के तहत नए नियम तैयार किए जा रहे हैं और इस पर अभी चर्चा जारी है।
याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि मौजूदा समय में एयरलाइंस के किराये पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है और कई मामलों में किराया 300 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जिससे आम यात्रियों पर बोझ पड़ रहा है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है और मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

