पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले एक बार फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को पत्र लिखकर राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की कोशिश की जा रही है, जिससे असली वोटरों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
ममता बनर्जी ने अपने पत्र में कहा कि बंगाल में लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ एक बड़ी साजिश रची जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोग हजारों फर्जी फॉर्म-6 आवेदन जमा कर बाहरी लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया वोटर हाइजैकिंग की कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की रणनीति पहले महाराष्ट्र और दिल्ली में भी अपनाई गई थी।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अभी भी 60 लाख से अधिक वास्तविक मतदाता जांच प्रक्रिया में फंसे हैं, जबकि बड़ी संख्या में फर्जी आवेदन तेजी से स्वीकार किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के कारण अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिसे उन्होंने बेहद चिंताजनक बताया।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के बाद कोई नया नाम शामिल न किया जाए।
चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग-ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से तुरंत हस्तक्षेप करने और इस कथित गड़बड़ी को रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अपने लोकतंत्र को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देगी।

