पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सरदार परगट सिंह ने पंजाब पीसीएस मुख्य परीक्षा के घोषित परिणामों पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि 331 पदों के लिए 751 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, लेकिन परिणामों के बाद अभ्यर्थियों द्वारा चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर जो सवाल उठाए जा रहे हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सरदार परगट सिंह ने कहा कि उम्मीदवारों की ओर से चार परीक्षा केंद्रों के कुछ विशेष कमरों से 10-11 उम्मीदवारों के चयन, कुछ कमरों में 40 प्रतिशत से अधिक शॉर्टलिस्टिंग, एक केंद्र पर 24.21 प्रतिशत और दूसरे केंद्र के एक कमरे में केवल 2.89 प्रतिशत चयन दर होने जैसे आंकड़ों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा चयनित उम्मीदवारों के लगातार रोल नंबर आने और कथित तौर पर परीक्षा में अनुपस्थित उम्मीदवारों के रोल नंबर चयन सूची में शामिल होने के आरोप भी गंभीर चिंता का विषय हैं। इन सभी बिंदुओं पर PPSC को तथ्यों सहित स्पष्टीकरण देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कुछ उम्मीदवारों के चयन या परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब की पूरी भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। सरकारी नौकरियों के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले हजारों युवा अपने परिवारों की उम्मीदों के साथ परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने से युवाओं के विश्वास को ठेस पहुंचती है।
परगट सिंह ने मांग की कि पीपीएससी के चेयरमैन सार्वजनिक रूप से सामने आकर सभी सवालों का जवाब दें और परीक्षा केंद्रों, कमरों के अनुसार चयन के आंकड़े, उपस्थिति रिकॉर्ड तथा रोल नंबरों से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। जांच ऐसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जानी चाहिए, जिसकी निष्पक्षता पर किसी को संदेह न हो।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से पूछा कि क्या उनकी सरकार पंजाब के युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया देने के लिए प्रतिबद्ध है? यदि चयन प्रक्रिया पूरी तरह सही है तो सरकार और पीपीएससी को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने तुरंत इसका जवाब देना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए
सरदार परगट सिंह ने कहा कि पंजाब के युवाओं को किसी की सिफारिश या किसी विशेष व्यवस्था की नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और योग्यता के आधार पर नौकरी पाने के समान अवसर की जरूरत है। सरकार की जिम्मेदारी है कि भर्ती प्रक्रिया पर उठने वाले हर सवाल का जवाब दे और युवाओं का भरोसा कायम रखे।

