Bihar News: AIMIM प्रवक्ता आदिल हसन ने अल्पसंख्यक कल्याण बजट पर RJD और कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता सदन में अल्पसंख्यकों के मुद्दे नहीं उठाते.
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने अल्पसंख्यक कल्याण के लिए बजट में कम राशि पेश होने के मामले पर महागठबंधन के मुस्लिम नेताओं पर जमकर हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि बजट पर आरजेडी और कांग्रेस के सभी मुस्लिम नेता खामोश थे.
आदिल हसन ने कहा कि कल शुक्रवार को विधान परिषद में माइनॉरिटी के बजट पर इन नेताओं ने कौम को धोखा दिया है. सवाल न पूछकर, आवाज न बुलंद करके. चाहे अब्दुल बारिक सिद्दीकी हो या कारी शोएब, जब-जब पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का मुद्दा होता है तो मजलिस ही बुलंदी से खड़ी होती है.
सभी पार्टियों से सवाल पूछने का आह्वान
उन्होंने कहा कि सवाल पूछिए आप, चाहे रहनुमा किसी भी पार्टी का हो. मजलिस से भी पूछिए, लेकिन और भी पार्टियों से जो मुसलमानों के वोट से जीतते तो हैं लेकिन उनके मुद्दे पर कुछ नहीं करते हैं. सवाल तथ्य के बुनियाद पर पूछिए, जिम्मेदारी के साथ पूछिए, जिम्मेदारी तय करने को पूछिए.
‘मुसलमानों पर कुछ नहीं बोलते’
आदिल हसन ने कहा कि ये लोग सिर्फ AIMIM को गाली देने का काम करते हैं. आप शौक से हम लोगों को गाली दीजिए, लेकिन माइनॉरिटी के मुद्दे को भी सदन में उठाइए. आप उनसे जब वोट लेते हैं तो उनके हित के लिए भी सदन में कुछ बोलिए. लेकिन ये लोग मुस्लिम-दलित पर कुछ भी नहीं बोलते हैं.
AIMIM के सभी विधायकों ने उठाए मुद्दे
उन्होंने दावा किया, “हमारे प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान सहित AIMIM के सभी पांचों विधायकों ने माइनॉरिटी के मुद्दे को सदन में उठाया है. चाहे कटाव का मामला हो, शिक्षा का मामला हो या अन्य कोई मामला हो, उनके हित के लिए सदन में आवाज बुलंद किया है.”
आरजेडी-कांग्रेस के मुस्लिम नेता चुप क्यों- आदिल
आदिल हसन ने कहा, “लेकिन आरजेडी और कांग्रेस के सभी मुस्लिम नेता चुप रहे. जमाखान तो मुस्लिम हैं, लेकिन वह सरकार में मंत्री हैं, इसलिए वह कुछ नहीं बोल सकते हैं. लेकिन आरजेडी और कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं को क्या हो गया है? वह सिर्फ माइनॉरिटी का वोट लेना जानते हैं.”
राजनीतिक गलियारों में हलचल
आदिल हसन के इस बयान ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. महागठबंधन के नेताओं से अब प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है. विपक्षी दलों पर यह गंभीर आरोप है कि वे अल्पसंख्यकों के वोट तो लेते हैं, लेकिन उनके मुद्दों पर सदन में आवाज नहीं उठाते.

