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Saturday, February 21, 2026
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ट्रंप देखते रह गए, भारत ने हाई टैरिफ को किया किनारे – रच डाला बड़ा खेल!

भारतीय डीजल भेज दरें: ग्लोबल रियल टाइम डेटा और एनालिटिक्स प्रदाता Kpler ने बताया है कि अगस्त महीने में भारत ने केवल यूरोप में ही डीजल की निर्यात में 73 प्रतिशत वृद्धि की है।

India Diesel Shipments To Europe: यूक्रेन वॉर की कोशिश को रुकवाने में अमेरिका हरसंभव प्रयास कर रहा है. इसके लिये राष्ट्रपति ट्रंप छल-बल तक लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी कोशिश में सफलता हाथ नहीं लग पा रही है. भारत पर ट्रंप ने जिस तरह 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया, वह भी परोक्ष तौर पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाने का प्रयास था. अमेरिका ने भारत पर भले ही 50 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ लगा दिया हो, लेकिन भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर मोटी कमाई कर ली है.

तेल बेचकर अच्छा मुनाफा कमाने का अवसर ।

सालाना आधार पर अगर देखें तो भारत ने अगस्त में दैनिक 2,42,000 बैरल डीजल निर्यात किया है, जो 137 प्रतिशत उछलकर है। हालांकि, यूरोपीय यूनियन ने रूसी कच्चे तेल के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्णय लिया है, जिसके बाद से जनवरी 2026 से भारत की सबसे बड़ी रूसी तेल और ईंधन निर्यातक कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए मुश्किल हो सकती है। विश्वव्यापी डेटा एंड एनालिटिक्स कंपनी Kpler के अनुसार, अगस्त महीने में भारत ने केवल यूरोप के लिए 73 प्रतिशत ज्यादा डीजल निर्यात किया है। यह सालाना आधार पर 124 प्रतिशत की वृद्धि का कारण है। दूसरी तरफ, एनर्जी ट्रैकर Vortexa का अनुमान है कि अगस्त में भारत ने यूरोप को दैनिक 2,28,316 बैरल डीजल निर्यात किया है। यह सालाना आधार पर 166 प्रतिशत की वृद्धि है, जो जुलाई की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है।

बाजार के जानकार कहते हैं कि क्या हो रहा है?

वास्तव में, यूरोप में भारत के तेल निर्यात में वृद्धि के कई कारण हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रिफाइनर्स द्वारा पूर्व-देखभाल का निर्णय, सर्दियों में मांग, और यूरोपीय संघ के प्रतिबंध – ये सभी कारक भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए वहाँ तेल बेचने की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे साल 2025 तक डीजल की मांग मजबूत रहेगी।

दूसरी ओर, भारत को इस संबंध में कठोर आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ रहा है। अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे प्रसंस्करण करके पश्चिमी देशों को बेचकर अच्छा लाभ कमा रहा है। इसके माध्यम से, भारत मॉस्को को यूक्रेन के खिलाफ जंग में वित्त प्रदान कर रहा है।

हालांकि, भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा है कि पश्चिमी देशों को यदि कोई आपत्ति है तो वे तेल की आपूर्ति बंद करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं।

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