NCERT ने अपने सिलेबस में तीन वीर सैनिकों के जीवन और उनके बलिदान की प्रेरणादायक कहानियां शामिल की हैं। फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की कहानी अब कक्षा 8 की उर्दू पुस्तक में पढ़ाई जाएगी

“एनसीआरटी के सिलेबस में बड़े बदलाव का एलान हुआ है। अब फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और मेजर सोमनाथ शर्मा की कहानियां स्टूडेंट्स के सिलेबस में शामिल की जाएँगी। यह घोषणा रक्षा मंत्रालय ने की है, जिसे 7 अगस्त को ट्वीट किया गया था। इस मामले को विस्तार से समझने के लिए फिर से विचार करें और समझें कि ये हमारे बच्चों के लिए क्यों आवश्यक है
सिलेबस में क्या परिवर्तन हुआ है?
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक ट्वीट के अनुसार, NCERT ने अपने सिलेबस में तीन वीर सैनिकों के जीवन और उनके बलिदान की कहानियां शामिल की हैं। फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की कहानी अब कक्षा 8 की उर्दू किताब में पढ़ाई जाएगी, जबकि ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की कहानी कक्षा 7 की उर्दू पुस्तक में जोड़ी गई है। वहीं, मेजर सोमनाथ शर्मा की वीरगाथा कक्षा 8 की अंग्रेजी पुस्तक में शामिल की गई है। यह पहल विद्यार्थियों को देश के सैनिकों की बहादुरी और त्याग से प्रेरित करने के उद्देश्य से की गई है। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इससे न केवल छात्रों को भारत के सैन्य इतिहास की जानकारी मिलेगी, बल्कि उनमें साहस, संवेदना, भावनात्मक समझ और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने जैसी मानवीय मूल्य भी विकसित होंगे
ये तीनों वीर कौन थे ?
फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, जिन्हें लोग सैम बहादुर के नाम से भी जानते हैं, देश के पहले फील्ड मार्शल थे जो 1973 में इस पद तक पहुंचे थे। सैम मानेकशॉ का जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में हुआ था और उनका निधन 27 जून 2008 को हुआ था। उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसमें 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। उनकी रणनीति और हिम्मत की वजह से ही बांग्लादेश आज एक स्वतंत्र देश है। उनके जीवन की कहानी बच्चों को यह बताएगी कि मेहनत और हौसले से कैसे मुश्किलों को हराया जा सकता है
ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान: ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान भारत के उन मुस्लिम सैनिकों में से एक थे, जिन्होंने 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सेवा की. उनका जन्म 15 जुलाई 1912 को उत्तर प्रदेश के बीबीपुर में हुआ था. 3 जुलाई 1948 को वह जंग के मैदान में शहीद हो गए. उस्मान ने जम्मू-कश्मीर में झंगर को दुश्मन से वापस लेने की कसम खाई थी और अपनी जान देकर उसे पूरा किया. उनकी कहानी बच्चों को सिखाएगी कि सच्चा देशभक्त धर्म से ऊपर देश को चुनता है
मेजर सोमनाथ शर्मा देश के पहले परमवीर चक्र विजेता थे, जिन्हें मरण के बाद यह सम्मान प्रदान किया गया था। उनका जन्म 31 जनवरी 1923 को हुआ था और 3 नवंबर 1947 को उन्होंने कश्मीर के बादगाम में अपनी जान न्योछावर कर दी थी। श्रीनगर हवाई अड्डे की रक्षा के लिए वे अपनी पूरी कंपनी के साथ दुश्मनों से जूझ रहे थे। उनकी वीरता के कारण आज हम सब कश्मीर को सुरक्षित महसूस करते हैं। इस कहानी से बच्चों को यह सिखने को मिलेगा कि अपनी ड्यूटी के लिए कोई भी कठिनाई का सामना करना पड़े तो उन्हें अपनी जान को भी दे देना चाहिए

