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Tuesday, January 13, 2026
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खांसी क्यों आती है? क्या फेफड़ों में जमा बलगम सेहत के लिए खतरनाक है?

अक्सर लोग खांसी को एक मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही खांसी शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर परेशानी का संकेत भी हो सकती है, खासतौर पर तब जब खांसी के साथ बलगम (कफ) आने लगे। खांसी ऐसी समस्या है, जिससे लगभग हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी जरूर जूझता है। कभी हल्की-सी गले की गुदगुदी खांसी का कारण बन जाती है, तो कभी लगातार खांसने से सीने में दर्द तक होने लगता है। ऐसे में मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि खांसी आखिर क्यों आती है और क्या फेफड़ों में जमा बलगम हमारे लिए खतरनाक हो सकता है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी पूरी जानकारी।

खांसी क्या है और क्यों आती है?

खांसी शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रक्रिया है। जब गले या फेफड़ों में धूल, धुआं, कीटाणु, एलर्जी के कण या ज्यादा बलगम जमा हो जाता है, तो शरीर खांसी के जरिए उन्हें बाहर निकालने की कोशिश करता है। इसे शरीर का सफाई तंत्र भी कहा जा सकता है। खांसी आने के प्रमुख कारणों में गले या श्वसन नलिकाओं में जलन, सर्दी-जुकाम या फ्लू, प्रदूषण, एलर्जी, फेफड़ों में अधिक बलगम बनना, पेट का एसिड ऊपर आना (एसिड रिफ्लक्स/GERD) और अस्थमा शामिल हैं।

बलगम (कफ) क्या होता है?

खांसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है—सूखी खांसी और कफ वाली खांसी। सूखी खांसी में बलगम नहीं निकलता और गले में खुजली या जलन महसूस होती है, जो आमतौर पर एलर्जी, वायरल संक्रमण या एसिड रिफ्लक्स के कारण होती है। वहीं कफ वाली खांसी में गाढ़ा बलगम निकलता है, जो सर्दी-जुकाम, ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसी बीमारियों में देखने को मिलता है। बलगम एक चिपचिपा पदार्थ होता है, जिसे फेफड़े और गला बनाते हैं। इसका काम श्वसन नलिकाओं को नम रखना और धूल-मिट्टी, कीटाणुओं व एलर्जी कणों को फंसा कर बाहर निकालना होता है। थोड़ी मात्रा में बलगम बनना सामान्य और जरूरी है।

क्या फेफड़ों में जमा बलगम खतरनाक होता है?

आमतौर पर फेफड़ों में हल्का और साफ बलगम होना खतरनाक नहीं होता, क्योंकि यह शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है। लेकिन कुछ स्थितियों में बलगम चिंता का कारण बन सकता है। यदि बलगम पीले या हरे रंग का हो जाए, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। बलगम में खून आना गंभीर स्थिति मानी जाती है और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा, अगर खांसी तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी रहे या इसके साथ सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, तेज बुखार या घरघराहट हो, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अस्थमा, टीबी, सीओपीडी या दिल से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

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