Ramadan 2026: 27वां रोजा 17 मार्च – सहरी-इफ्तार और खास महत्व
पाक, बरकत और रहमतों से भरा महीना रमजान 2026 अब अपने अंतिम चरण में है और ईद की घड़ी नजदीक आ रही है। पूरे महीने मुसलमानों ने इबादत और रोजा के साथ अपने आस्था का प्रदर्शन किया है। इसी कड़ी में 17 मार्च, सोमवार को रमजान का सत्ताईसवां रोजा रखा जाएगा।
27वें रोजे का महत्व
रमजान का सत्ताईसवां रोजा इस्लामिक मान्यताओं में बेहद खास माना जाता है। कहा जाता है कि यह रोजा दोजख (जहन्नुम) से मुक्ति दिलाने का अवसर देता है और कुरान और हदीस में इसका विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन की गई इबादत, फितरा और रोजा रोजेदारों को दोहरा सवाब दिलाते हैं।
इस रोजे की रात शब-ए-कद्र (लैलातुल कद्र) भी होती है, जिसे अल्लाह के करीब जाने का सबसे बड़ा मौका माना जाता है। मुसलमान इस रात नमाज, तिलावत और दुआ में वक्त बिताते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।
रोजेदारों की दिनचर्या
27वें रोजे के दिन रोजेदार:
- सुबह सहरी के बाद रोजा शुरू करते हैं।
- दिनभर रोजा रखते हैं और सूर्यास्त के बाद इफ्तार करते हैं।
- इफ्तार के बाद तरावीह, नफ्ल नमाज और कुरान की तिलावत करते हैं।
- कई जगहों पर सामूहिक इफ्तार और दुआ का आयोजन भी किया जाता है।
इस सत्ताईसवें रोजे को जितना संभव हो उतना भक्ति और इबादत में बिताना बेहद फज़ीलत वाला माना जाता है।
दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, कानपुर, चेन्नई और अन्य शहरों के रोजेदार 17 मार्च 2026 के सत्ताईसवें रोजे के लिए समय से रोजा शुरू और इफ्तार करें, ताकि रोजा पूरी तरह से काबिले-कबूल और बरकत वाला हो।
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ईद की तैयारियां शुरू, घर-बार सजेगा खुशियों के रंगों से
रमजान का 27वां रोजा आते-आते ईद-उल-फितर की तैयारियां पूरे जोरों पर शुरू हो जाती हैं। लोग नए कपड़े, सेवइयां, मिठाइयां और घर की साज-सजावट में जुट जाते हैं, ताकि त्योहार खुशियों और बरकत से भरा हो।
हालांकि, ईद की सटीक तारीख का फैसला चांद देखने के बाद ही होता है। संभावना है कि भारत में 20 मार्च की रात चांद नजर आए और 21 मार्च को ईद मनाई जाएगी। आधिकारिक तारीख की घोषणा शव्वाल का चांद दिखने के बाद ही की जाएगी

