1 फरवरी से सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला पर नई एक्साइज ड्यूटी लागू होगी. जानिए सिगरेट कितनी महंगी होगी, टैक्स कितना बढ़ा और इसका असर.
सिगरेट पीना सेहत के लिए नुकसानदायक माना ही जाता रहा है, लेकिन अब यह आदत जेब पर भी भारी पड़ने वाली है. केंद्र सरकार ने सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला पर टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. 1 फरवरी से इन उत्पादों पर नई एक्साइज ड्यूटी लागू की जाएगी, जिसके बाद इनकी कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है. सरकार ने अब तक लगाए जा रहे GST कम्पनसेशन सेस को हटाकर सीधे भारी एक्साइज ड्यूटी लगाने का फैसला लिया है. इसका सीधा मतलब यह है कि तंबाकू से जुड़े सभी उत्पाद पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महंगे हो जाएंगे.
वित्त मंत्रालय ने सेंट्रल एक्साइज एक्ट में संशोधन किया है, जो 1 फरवरी से प्रभावी होगा. नए नियमों के अनुसार सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी कई गुना बढ़ा दी गई है. अब हर 1000 सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी की दर 2050 से 8500 तक तय की गई है. कुछ खास श्रेणियों की सिगरेट पर यह टैक्स 11,000 तक भी पहुंच सकता है. टैक्स की दर सिगरेट की लंबाई और उसकी कैटेगरी पर निर्भर करेगी. पहले जहां एक्साइज ड्यूटी कुछ सौ रुपये तक सीमित थी, अब इसे कई गुना बढ़ा दिया गया है. इसके साथ सिगरेट पर पहले से लागू 40 प्रतिशत जीएसटी भी जारी रहेगा. इस तरह कुल टैक्स बोझ 60 से 70 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जो पहले लगभग 50 से 55 प्रतिशत था.
1 फरवरी के बाद सिगरेट की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा
नई टैक्स व्यवस्था का सीधा असर सिगरेट की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा. बाजार से जुड़े जानकारों के अनुसार जो सिगरेट अभी लगभग ₹18 में मिलती है, उसकी कीमत बढ़कर 70 से 72 तक पहुंच सकती है. इसका मतलब है कि रोजमर्रा की सस्ती सिगरेट भी अब आम उपभोक्ता के लिए महंगी हो जाएगी.
सिर्फ सिगरेट नहीं, अन्य तंबाकू उत्पाद भी होंगे महंगे
नई एक्साइज ड्यूटी का असर केवल सिगरेट तक सीमित नहीं रहेगा. कच्चे तंबाकू पर भी 60 से 70 प्रतिशत तक एक्साइज ड्यूटी लगाने की तैयारी है. ई-सिगरेट और निकोटिन से जुड़े अन्य उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जा सकता है. इसके अलावा पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों पर हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस भी लागू किया जाएगा. इससे साफ है कि सरकार का फोकस सभी प्रकार के तंबाकू और नशे से जुड़े उत्पादों को महंगा बनाने पर है.
एक्सपर्ट क्यों जता रहे हैं चिंता
जहां सरकार का उद्देश्य नशे को हतोत्साहित करना और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया जा रहा है, वहीं कई विशेषज्ञ इस फैसले को लेकर चिंता भी जता रहे हैं. उनका कहना है कि टैक्स बढ़ाने से लोग सिगरेट छोड़ ही देंगे, यह जरूरी नहीं है. विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा कीमतों की वजह से लोग सस्ती और अवैध सिगरेट की ओर रुख कर सकते हैं. थिंक चेंज फोरम जैसे संगठनों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा टैक्स गैर-कानूनी बाजार को बढ़ावा दे सकता है.
स्मगलिंग बढ़ने का खतरा
भारत पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े अवैध सिगरेट बाजारों में शामिल है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 26 प्रतिशत सिगरेट बिना टैक्स के बेची जाती हैं. ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन और नोमुरा का मानना है कि भारी टैक्स बढ़ोतरी के बाद लोग कानूनी सिगरेट छोड़कर तस्करी वाली सस्ती सिगरेट खरीद सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो सरकार को उम्मीद के मुताबिक टैक्स राजस्व नहीं मिल पाएगा और अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है.
तंबाकू किसानों और रोजगार पर असर
तंबाकू किसानों की संस्था FAIFA ने भी इस फैसले पर चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि टैक्स बढ़ने से कानूनी सिगरेट की मांग घटेगी, जिसका सीधा असर तंबाकू किसानों की आमदनी पर पड़ेगा. पिछले कुछ वर्षों में तंबाकू की खेती का रकबा पहले ही कम हुआ है, जबकि खाद, मजदूरी और उत्पादन लागत बढ़ती जा रही है. ऐसे में टैक्स बढ़ोतरी से किसानों और इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका पर असर पड़ सकता है.

