प्राचीन भारत में भी लोग जल्दी खाना खाते थे. आमतौर पर सूर्यास्त से पहले ही अपना आखिरी खाना कर लिया जाता था. इसके पीछे कई कारण थे. पहला कारण प्राकृतिक जैविक घड़ी या सर्कैडियन रिदम के साथ तालमेल था.
आजकल लोग अपनी सेहत के लिए बहुत कुछ करते हैं. फिटनेस के लिए जिम जाते हैं, डाइटिंग करते हैं, और हेल्दी खाने की आदतें अपनाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी थाली में क्या है, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि आप रात का खाना कब खाते हैं, यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन अब वैज्ञानिक और डॉक्टर दोनों यह मानने लगे हैं कि खाने का समय आपके स्वास्थ्य पर बड़ा असर डालता है.
प्राचीन भारत में भी लोग जल्दी खाना खाते थे. आमतौर पर सूर्यास्त से पहले ही अपना आखिरी खाना कर लिया जाता था. इसके पीछे कई कारण थे. पहला कारण प्राकृतिक जैविक घड़ी या सर्कैडियन रिदम के साथ तालमेल था. दूसरा कारण पाचन और आंतों का स्वास्थ्य था. वहीं तीसरा और आसान कारण यह था कि उस समय बिजली या आधुनिक लाइट नहीं थी, इसलिए लोग जल्दी सो जाते थे. आयुर्वेद में भी कहा गया है कि सूर्यास्त के बाद पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है. यही वजह है कि रात में खाना पचाना मुश्किल हो जाता है.
देर रात खाना खाने के नुकसान
देर रात खाना खाने से आपके पेट और शरीर दोनों पर असर पड़ता है. इससे फैट जलाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. इंसुलिन संवेदनशीलता 30-40 प्रतिशत तक गिर सकती है. नींद के हार्मोन प्रभावित होते हैं.पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता है. जब आप रात में देर से खाते हैं, तब शरीर अपने मरम्मत और डिटॉक्स के काम के बजाय पाचन में लगा रहता है. इसलिए आप 8 घंटे की नींद के बाद भी भारीपन, पेट फूलना या थकान महसूस कर सकते हैं.
खाने का सही समय क्यों जरूरी है?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित शोध में भी बताया गया है कि शाम को जल्दी खाना खाने से शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. जल्दी रात का खाना खाने के कई फायदे हैं. इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार होता है. रात में ग्लूकोज का स्तर 15 प्रतिशत तक कम हो सकता है. नींद की क्वालिटी बेहतर होती है. जब आप देर रात और जल्दी रात के खाने में कैलोरी की मात्रा समान रखें. इसका कारण है कि सूर्यास्त के बाद मेलाटोनिन का स्तर बढ़ जाता है, जो नींद में मदद करता है, और इंसुलिन का स्राव कम हो जाता है. अगर इस समय आप खाना खाते हैं, तो नींद खराब हो सकती है और शरीर में वसा जमा होने का खतरा बढ़ जाता है.
छोटी-सी देरी भी असर डालती है
ढाई घंटे का अंतर भी बड़ा फर्क डाल सकता है. इसके लिए अगर आप शाम 7 बजे खाना खाते हैं, तो नींद बेहतर आएगी और शुगर लेवल स्थिर रहेगा. लेकिन अगर आप रात 9:30 बजे खाना खाते हैं, तो शुगर लेवल तेजी से बढ़ेगा. विशेष रूप से, डायबिटीज या फैटी लिवर वाले लोगों के लिए यह और भी खतरनाक हो सकता है. देर रात खाने से उनके शुगर लेवल में 30-50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है.

