
आज जब भी भारत में “मोदी” नाम लिया जाता है, तो सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा सामने आता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके राजनीति में आने से कई दशक पहले ही “मोदी” नाम देश के औद्योगिक, कारोबारी और शहरी विकास के इतिहास में अपनी मजबूत पहचान बना चुका था. उत्तर प्रदेश का मोदीनगर, देश का प्रतिष्ठित मोदी ग्रुप और के.के. मोदी परिवार—ये सभी नाम भारतीय उद्योग जगत के अहम स्तंभ रहे हैं. यह कहानी उस परिवार की है, जिसने न केवल बड़े-बड़े कारखाने लगाए, बल्कि एक पूरे शहर को बसाकर भारत के औद्योगिक नक्शे पर अपनी स्थायी छाप छोड़ी.
मोदीनगर की नींव और विकास
गाजियाबाद से मेरठ को जोड़ने वाली सड़क पर स्थित मोदीनगर आज एक विकसित शहर के रूप में जाना जाता है. हालांकि इसका पुराना नाम बेगमाबाद था. कभी यह करीब 573 एकड़ में फैला एक छोटा सा गांव हुआ करता था, जिसे दिल्ली की शाही बेगम के सम्मान में बेगमाबाद नाम दिया गया था. वर्ष 1945 तक यह टाउन एरिया रहा और 1963 में इसे नोटिफाइड एरिया घोषित किया गया. आज यह एक तहसील के रूप में स्थापित है. यहां 19वीं शताब्दी में रानी वालाबाई सिंधिया द्वारा बनवाया गया मंदिर आज भी मौजूद है, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाता है.
मोदीनगर की स्थापना 1933 में राय बहादुर गुजरमल मोदी ने की थी. उन्होंने बेगमाबाद को एक आधुनिक औद्योगिक टाउनशिप के रूप में विकसित किया और अपने परिवार के नाम पर इसका नाम मोदीनगर रखा. अपने भाई केदारनाथ मोदी के साथ मिलकर उन्होंने सबसे पहले शुगर मिल की स्थापना की, जिससे मोदी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की नींव पड़ी. इसके बाद कपड़ा, केमिकल, कागज और अन्य कई उद्योग स्थापित हुए और मोदीनगर धीरे-धीरे उत्तर भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो गया.
के.के. मोदी और कारोबारी विरासत
गुजरमल मोदी की आठ संतानों में से एक के.के. मोदी ने पिता के निधन के बाद कारोबार की कमान संभाली और ग्रुप को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. गुजरमल मोदी के जीवनकाल में ही मोदी ग्रुप की नेटवर्थ लगभग 900 करोड़ रुपये और सालाना बिक्री करीब 1,600 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी थी. उस दौर में यह भारत का सातवां सबसे बड़ा औद्योगिक समूह बन गया था. के.के. मोदी के नेतृत्व में गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया लिमिटेड ग्रुप की प्रमुख कंपनी बनी, जो सिगरेट और पान मसाला जैसे उत्पादों के लिए जानी जाती है और देश की दूसरी सबसे बड़ी सिगरेट निर्माता कंपनी मानी जाती है.
के.के. मोदी का निधन 2 नवंबर 2019 को हुआ. इसके बाद परिवार में उत्तराधिकार को लेकर विवाद सामने आया. विवाद का केंद्र गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया रहा, जिसमें करीब 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है. बड़े बेटे ललित मोदी ने कारोबार बेचकर संपत्ति के बंटवारे का प्रस्ताव रखा, जबकि बीना मोदी ने इसका विरोध किया.
मोदी ग्रुप की नई योजनाएं
जनवरी 2024 में मोदी ग्रुप ने दिल्ली के ताज होटल में ‘Modi Brand’ का भव्य लॉन्च किया. ग्रुप ने करीब 6,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की, जिसमें हेल्थ, वेलनेस, टेक्नोलॉजी और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स पर विशेष फोकस रखा गया है. इन योजनाओं से हजारों नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है. दिल्ली की साकेत हेल्थ सिटी, मोदीपुर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, मोदी स्टूडियोज की फिल्म परियोजनाएं, आदि शंकराचार्य पर आधारित फिल्म और ऋषिकेश व द्वारका में योग-वेलनेस रिट्रीट जैसी योजनाएं ग्रुप की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं.

