How Monogamous Are Humans: हमारे यहां सदियों से यही सिखाया जाता रहा है कि अगर रिश्ता सुखद और हेल्दी चाहिए तो मोनोगैमी अपनाना चाहिए. लेकिन इंसान आखिर कितना मोनोगैमस होता है, आइए जानें.

प्यार की कहानियां हमें हमेशा ये सिखाती हैं कि जिंदगी में एक सच्चा साथी मिल जाए तो लाइफ पूरी हो जाती है. ज्यादातर शादियां, लव स्टोरीज और रोमांटिक फिल्में हमें यही दिखाती हैं. लेकिन क्या इंसान सच में अपना पूरा जीवन सिर्फ एक ही साथी के साथ बिताता है? कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की एक नई स्टडी ने इंसानों की मोनोगैमी यानी एक-एक साथी के साथ जीवन भर रहने की आदत पर ऐसा आंकड़ा पेश किया है, जो हमारे ख्यालों से अलग और चौंकाने वाला है. आइए जान लेते हैं.
प्यार की आदत या समाज का नियम?
हम हमेशा सोचते हैं कि इंसान प्यार में अपनी पूरी जिंदगी एक ही साथी के साथ बिताता है. रोमियो-जूलियट, हीर-रांझा जैसी कहानियां तो हमें यही सिखाती हैं. शादी में जन्म-जन्म तक साथ निभाने की कसमें भी इस भरोसे की तसदीक करती हैं. लेकिन क्या ये सिर्फ सामाजिक आदर्श हैं, या सच में इंसान का स्वभाव भी ऐसा है?
इंसानों की मोनोगैमी का पैमाना
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता मार्क डाइबल ने इंसानों और जानवरों की मोनोगैमी पर गहराई से रिसर्च किया. उन्होंने देखा कि किसी आबादी में पैदा हुए बच्चों में कितने सगे भाई-बहन हैं. जो प्रजाति ज्यादा सगे भाई-बहन पैदा करती है, उसे ज्यादा मोनोगैमस माना गया. इस तरीके से इंसान, अन्य जानवरों और स्तनधारियों की तुलना की गई.
इंसान मोनोगैमी लीग में कितने नंबर पर
इस रिसर्च में में इंसान सातवें नंबर पर आया. इसका मतलब ये है कि हम पूरी तरह एक ही लाइफ पार्टनर पर नहीं चलते हैं, लेकिन पूरी तरह गैर-मोनोगैमस भी नहीं हैं. इंसान यूरेशियन बीवर से कम मोनोगैमस हैं, लेकिन मीयरकैट, रेड फॉक्स और लार गिबन से ज्यादा है. इस लिस्ट में टॉप पर कैलिफोर्निया डीयर माउस है, जो जीवन भर एक ही साथी के साथ रहता है.
मोनोगैमी का असली कारण
डाइबल कहते हैं कि इंसान में मोनोगैमी का कारण सिर्फ रोमांस नहीं है. असल वजह बच्चों की सुरक्षा और पालन-पोषण है. लंबे समय तक एक ही साथी के साथ रहने से बच्चे सुरक्षित रहते हैं, उनके पास संसाधन होते हैं और परिवार मजबूत बनता है. इसलिए प्यार के अलावा ये एक तरह की प्रैक्टिकल रणनीति भी है.
इंसानी रिश्ते केवल रोमांस नहीं
हमें लगता है कि प्यार ही मोनोगैमी का कारण है, लेकिन सच यह है कि इंसान के रिश्ते सिर्फ प्रेम की वजह से नहीं टिकते हैं. परिवार, दोस्त, रिश्तेदार, समाज- इन सबके बीच के रिश्ते ही इंसानी जिंदगी को चलाते हैं. मोनोगैमी ने इंसान को सहयोगी, समझदार और सामाजिक प्राणी बनाया है.
फिल्मों और कहानियों से हकीकत तक
फिल्में और किताबें हमें सच्चा प्यार, एक ही साथी का ख्याल जरूर देती हैं, लेकिन असली दुनिया में इंसान उतना ही मोनोगैमस है जितना कि जीवन और समाज की जरूरत उसे रहने देती है. प्यार, अपनापन और भरोसा जरूरी है, लेकिन इसके पीछे बच्चों और समाज की सुरक्षा का भी हाथ है.
इंसान और अन्य जानवर
रिसर्च में इंसान के अलावा जानवरों की मोनोगैमी भी जांची गई. अफ्रीकन वाइल्ड डॉग, मोल रैट जैसे जानवर इंसानों से ज्यादा मोनोगैमस पाए गए. सबसे कम मोनोगैमस सोए शीप (भेड़) और कुछ मंकी प्रजातियां थीं. इससे पता चलता है कि इंसान पूरी तरह से सिर्फ एक ही पार्टनर के लिए नहीं बना है.

