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Tuesday, January 13, 2026
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बेंगलुरु बुलडोजर एक्शन: कर्नाटक सरकार ने पुनर्वास के दावे को नकारा, कहा- झील क्षेत्र में था कब्जा

एडवोकेट जनरल शशि किरण शेट्टी ने याचिका में किए गए दावों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह दावा कि लोग उस इलाके में 28 सालों से रह रहे हैं, जोकि गलत है.

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार (7 जनवरी, 2026) को एक जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें बेंगलुरु के कोगिलु लेआउट के पास सरकारी जमीन पर बने रिहायशी ढांचों को गिराए जाने पर सवाल उठाया गया है. याचिकाकर्ता जबिया तबस्सुम और अन्य लोग, जिनके घर गिरा दिए गए थे, उन्होंने दावा किया कि 28 सालों से लगभग 3,000 लोग इस इलाके में रह रहे थे और वसीम लेआउट और फकीर लेआउट में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से की गई तोड़फोड़ के बाद वे बेघर हो गए.

जनहित याचिका में प्रभावित निवासियों के लिए पुनर्वास और मुआवजे की मांग की गई है. एडवोकेट जनरल शशि किरण शेट्टी ने याचिका में किए गए दावों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह दावा कि लोग उस इलाके में 28 सालों से रह रहे हैं, जोकि गलत है.

उन्होंने कहा कि सरकार कोर्ट के सामने हर गैरकानूनी तरीके से बने घर की सैटेलाइट तस्वीरें पेश करेगी. उन्होंने आगे तर्क दिया कि पुनर्वास से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले में लागू नहीं होगा. उन्होंने कोर्ट को बताया कि विस्थापित निवासियों के लिए अस्थायी इंतजाम किए गए हैं और सरकार खाना और मेडिकल सुविधाएं दे रही है. विस्तृत आपत्तियां दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय भी मांगा गया है.

उन्होंने यह भी बताया कि तोड़ा गया इलाका एक झील के कैचमेंट एरिया में आता है, इसलिए यह रहने के लिए ठीक नहीं है. इस संदर्भ में तोड़फोड़ की गई क्योंकि आरोप था कि निवासी वहां अवैध रूप से रह रहे थे. कोर्ट ने दलीलें रिकॉर्ड कीं और मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी के लिए तय की. इस बीच, अधिकारियों ने उन निवासियों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों का वेरिफिकेशन किया, जिनके घरों को गिरा दिया गया था.

भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बांग्लादेशियों को घर देना चाहती है और चेतावनी दी है कि अगर अतिक्रमण करने वालों को घर दिए गए तो वह कानूनी लड़ाई लड़ेगी और विरोध प्रदर्शन करेगी.

भाजपा नेताओं ने कहा कि यह जमीन कन्नड़ लोगों की है और घोषणा की कि वे इसे बांग्लादेशियों को नहीं सौंपने देंगे. नेताओं ने ऐसे पोस्टर पकड़े हुए थे जिन पर सवाल था कि क्या स्थानीय लोगों के लिए घर उपलब्ध नहीं हैं और कथित अवैध प्रवासियों को घर कैसे दिए जा सकते हैं. पोस्टरों में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का भी आरोप लगाया गया.

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