
भारत सरकार स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में आयुर्वेद को शामिल करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि NCERT और UGC मिलकर नए सिलेबस पर काम कर रहे हैं, जिसे अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को समग्र स्वास्थ्य और भारतीय परंपराओं से जोड़ना है।
आयुष मंत्रालय ने भी इस कदम की पुष्टि की है और बताया कि यह केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जीवनशैली और स्वास्थ्य की भारतीय परंपरा को अपनाने का माध्यम होगा। कुछ राज्यों जैसे गोवा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने पहले ही अपनी शिक्षा प्रणाली में भारतीय ज्ञान को शामिल करना शुरू कर दिया है।
साथ ही, आयुर्वेद की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए CCRAS और अन्य संस्थान वैज्ञानिक क्लिनिकल ट्रायल कर रहे हैं, और WHO के साथ मिलकर मानक तय किए जा रहे हैं ताकि आयुर्वेद वैज्ञानिक रूप से भी भरोसेमंद बने। केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आयुर्वेद और एलोपैथी विरोधी नहीं बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं, और सरकार दोनों पद्धतियों के साथ मिलकर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने पर काम कर रही है।

