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Tuesday, February 10, 2026
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हर व्यक्ति तक जीएसटी रेट कट का लाभ पहुंचाने पर वित्त मंत्री 22 सितंबर से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

निर्मला सीतारमन ने जीएसटी कटौती पर कहा: वित्त मंत्री ने बताया कि जीएसटी सुधारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जीएसटी दर में कटौती से लाभ आम आदमी, किसानों और छोटे व्यापारियों तक पहुंचे।निर्मला सीतारमण ने जीएसटी कट्स पर कहा है कि 22 सितंबर से इसका अमल होगा। उन्होंने व्यापारियों को जीएसटी रेट में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की बात की है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार एक पैकेज पर काम कर रही है जो अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों को राहत पहुंचाएगा।

किसानों से लेकर आम आदमी को होगा फायदा 

वित्त मंत्री ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशों के अनुसार लागू की गई जीएसटी रिफॉर्म्स का उद्देश्य यह है कि जीएसटी रेट में कटौती के लाभ को सामान्य जनता, किसानों और छोटे व्यापारियों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने बताया कि वित्त मंत्रालय उद्योग जगत के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि इसका लाभ सभी उपभोक्ताओं तक पहुंचे। सरकारी बीमा कंपनियों और एक प्रमुख भारतीय ऑटो कंपनी जैसी कई कंपनियों का भी उल्लेख करते हुए, जिन्होंने कीमतें कम करने की योजना बनाई है।

उपभोग को मिलेगा बढ़ावा, होगा विकास 

वित्त मंत्री ने व्यक्त किया है कि वे कीमतों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। सांसदों ने भी मुख्य बात की है कि वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ऐसा करने की बात कही है। मंत्रालय भी संबंधित क्षेत्रों के साथ चर्चा कर रहे हैं। 22 सितंबर से मेरा पूरा ध्यान इस पर रहेगा। नई दरें नवरात्रि के पहले दिन 22 सितंबर से लागू होंगी। इस दिन से फेस्टिव सीजन की भी शुरुआत हो रही है और उपभोक्ताओं को सामानों पर जीएसटी रेट कट का सीधा लाभ पहुंचेगा। नए रिफॉर्म्स के तहत 375 वस्तुओं पर जीएसटी दरें कम की जाएंगी। जबकि सिर्फ 13 वस्तुएं लग्जरी और सिन गुड्स की कैटेगरी में हैं। इस संदर्भ में, वित्त मंत्री की उम्मीद है कि चीजों की कीमतों में कमी से उपभोग और विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने दरों में स्थिरता बनाए रखने की भी बात की है।

सिर्फ रेवेन्यू के बारे में नहीं सोचना है 

इस समय वित्त मंत्री ने कुछ गैर-एनडीए राज्यों के जीएसटी सुधारों से रेवेन्यू को नुकसान पहुंचने की बात पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, “यह गलत नहीं है कि केवल राज्यों का राजस्व ही प्रभावित हो रहा है, केंद्र भी इसमें समान रूप से सहयोग कर रहा है। क्या यह मेरे लिए एक नैतिक संकट नहीं है?… लेकिन जब पैसा जनता की जेब में जा रहा है, तो क्या मुझे केवल अपने राजस्व की चिंता करनी चाहिए? यह संभव नहीं है।” इन सभी विचारों के बीच केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल ने भी यह बयान दिया कि कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जीएसटी दर कमी के पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे।

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