GST 2.0 के लिए माना जा रहा है कि इससे सरकारी बोझ बढ़ेगा और टैक्स से होने वाली आमदनी पर असर पड़ेगा, लेकिन अर्थव्यवस्था और रोजगार पर इसका बेहद सकारात्मक प्रभाव होगा. इससे जीडीपी की रफ्तार भी तेज होने की उम्मीद है.

भारतीय व्यापारिक नेताओं ने जीएसटी सुधार पर अपने विचार व्यक्त किए हैं: अमेरिका से आए टैरिफ के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 79वें स्वतंत्रता दिवस पर घरेलू अर्थव्यवस्था को संदेश दिया था, जिसके बाद जीएसटी काउंसिल ने इसे मंजूरी दी। इसके बाद, चार स्लैब की जगह दो स्लैब कर दिए गए और अधिकांश रोजमर्रा की चीजों पर टैक्स कम कर दिया गया या पूरी तरह से उन्हें हटा दिया गया। यह बदलाव 22 सितंबर से प्रभावी होगा। संभावित रूप में सरकारी बोझ वृद्धि हो सकती है और टैक्स से आने वाली आमदनी पर प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन इसका अर्थव्यवस्था और रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव होगा। इससे जीडीपी की गति भी तेज होने की उम्मीद है।
क्या कहते हैं बड़े कारोबारी?
भारतीय कारोबारी हस्तियों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। Edelweiss Asset Management की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता ने सोशल मीडिया पर इसे चुनौतीपूर्ण समय में एक प्रगतिशील कदम बताया और कहा कि इससे मांग और सकारात्मक रुझान दोनों को मजबूती मिलेगी। उद्योगपति हर्ष गोयंका ने इसे आम लोगों के लिए दिवाली गिफ्ट करार दिया और कहा कि रोजमर्रा की आवश्यक चीजें, हेल्थकेयर, एजुकेशन और एग्रीकल्चर से जुड़ी वस्तुओं के दाम कम कर दिए गए हैं.
महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने भी इसे सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इस तरह के सुधार निवेश और उपभोग को बढ़ावा देंगे और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत करेंगे. उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध उपदेश का हवाला देते हुए और अधिक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया.
जीएसटी 2.0 के बाद उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हो रही है। इन्क्रेड वेल्थ के सीईओ नितिन राव ने बताया कि सरकार श्रम-प्रधान उद्योगों को राहत देने और वस्तुओं की कीमतें कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मुथूट माइक्रोफिन के सीईओ सदाफ सईद ने कहा कि आरबीआई द्वारा हाल ही में 0.5 प्रतिशत की दर कटौती और जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने का फैसला देश की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगा।
इसके साथ ही, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि रोजमर्रा की वस्तुओं और जरूरी चीजों पर दरें कम करने से न केवल परिवारों को तत्काल राहत मिलेगी, बल्कि यह देश की आर्थिक वृद्धि के लिए मजबूत नींव रखेगा।
इन प्रतिक्रियाओं के पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को रोजमर्रा की जरूरत की चीजों, ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कृषि सामानों पर जीएसटी दरों में कटौती का ऐलान किया था। 56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में टैक्स स्लैब को चार से दो कर दिया गया और 28 प्रतिशत तथा 12 प्रतिशत के जीएसटी स्लैब को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

