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Thursday, April 9, 2026
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पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच कतर जाएंगे पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, एलएनजी सप्लाई पर करेंगे अहम बातचीत

नई दिल्ली । केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9 से 10 अप्रैल के बीच कतर का दौरा करेंगे। इस दौरान वे चल रहे ईरान संघर्ष के कारण प्रभावित हुई लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की सप्लाई को लेकर अहम बातचीत करेंगे। सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में मंत्रालय ने कहा, “केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9-10 अप्रैल, 2026 को कतर राज्य की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे।” वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव के बावजूद भारत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।
इससे पहले कतर की सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने पिछले महीने लंबी अवधि के एलएनजी सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स पर ‘फोर्स मेजर’ लागू कर दिया था, जिससे इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों को जाने वाली सप्लाई प्रभावित हुई थी।
हालांकि भारत का नाम इस सूची में नहीं था, लेकिन कतर से एलएनजी खरीदने वाले प्रमुख देशों में भारत भी शामिल है।

कतर एनर्जी के सीईओ साद अल-काबी के अनुसार, फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से कतर पर ईरान के हमलों के कारण ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है। इससे देश की करीब 17 प्रतिशत एलएनजी निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है।
हमलों में कतर के 14 एलएनजी प्लांट्स में से 2 और 2 गैस-टू-लिक्विड (जीटीएल) सुविधाओं में से 1 को नुकसान पहुंचा है, जिससे करीब 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष उत्पादन ठप हो गया है। उन्होंने कहा कि इसकी मरम्मत में 3 से 5 साल का समय लग सकता है।
इस संकट से कतर को हर साल करीब 20 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान है और इससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, खासकर यूरोप और एशिया के देशों में।
इससे पहले मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी से बात की थी और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की कड़ी निंदा की थी। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया था।
इस बीच, भारतीय कंपनियां एलएनजी की आपूर्ति के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख कर रही हैं, जिसका उपयोग मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्र में होता है।
भारत ने 2025 में करीब 25.5 मिलियन टन एलएनजी आयात किया था और सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश के कुल ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का है।

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