मोहाली : इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस (ISB) ने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अपने प्रमुख पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (PGP) की 25वीं बैच के स्नातक समारोह का आयोजन किया। हैदराबाद और मोहाली के परिसरों में आयोजित इस ग्रेजुएशन समारोह में 2026 पीजीपी बैच के 808 ग्रेजुएट्स को डिग्री वितरित की गईं। ग्रेजुएशन समारोह का उद्घाटन प्रोफेसर मदन पिलुटला, डीन, आई.एस.बी; श्री राकेश भारती मित्तल, चेयरपर्सन, मोहाली कैंपस एडवाईज़री बोर्ड के नेतृत्व में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि फ्रैंसेस्का कॉर्नेली, डीन, कैलोग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी तथा वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों ने भी हिस्सा लिया।

आईएसबी पीजीपी प्रोग्राम की शुरुआत साल 2001 में की गई थी। यह अनुभव-प्राप्त प्रोफेशनल्स के लिए भारत का पहला एकवर्षीय, फुल-टाईम रेज़िडेंशियल मैनेजमेंट प्रोग्राम है। इस प्रोग्राम का उद्देश्य बदलती व्यवसायिक जरूरतों के अनुरूप सशक्त और कारगर लर्निंग के माध्यम से भारत एवं विश्व की अर्थव्यवस्था के लिए लीडर्स का विकास करना है। पीजीपी के 25 बैचों में इस प्रोग्राम द्वारा विभिन्न पृष्ठभूमियों और उद्योगों को 14,000 से अधिक प्रोफेशनल ग्रेजुएट हो चुके हैं।

नॉर्थ वेस्ट यूनिवर्सिटी के कैलोग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की डीन, फ्रैंसेस्का कॉर्नेली ने कहा कि इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस ग्रेजुएट्स का नया बैच एक परिवर्तनकारी समय में प्रोफेशनल दुनिया में प्रवेश कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस उद्योगों में परिवर्तन ला रही है तथा विश्व की आर्थिक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि बिज़नेस लीडरशिप की जरूरतों में भी बदलाव हुआ है। लीडर्स का दायित्व अब केवल लाभ प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अस्थिरता से निपटना, आत्मविश्वास बढ़ाते रहना और ध्रुवीकरण की ओर बढ़ती दुनिया में हितधारकों के बीच संपर्क स्थापित करना जरूरी हो गया है। केलोग और आईएसबी के बीच पच्चीस सालों की मजबूत पार्टनरशिप के बारे में बात करते हुए, डीन कोरेली ने कहा कि भारत ग्लोबल इनोवेशन में केंद्रीय शक्ति के रूप में उभर रहा है।

इस समय आईएसबी ग्रेजुएट्स के पास विश्व के भविष्य को आकार देने का अद्वितीय अवसर है। उन्होंने ग्रेजुएट्स से अपनी शिक्षा का उपयोग विभिन्न विचारों और लोगों को आपस में जोड़ने के लिए करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि असली प्रगति और स्थायी परिवर्तन तभी संभव है, जब जिज्ञासु बने रहकर अन्य देशों के साथ सहयोग करते हुए ईमानदारी से नेतृत्व किया जाए।

