IndiGo flight cancellations: CCI ने इंडिगो के खिलाफ दिसंबर 2025 में हुए फ्लाइट कैंसिलेशन को लेकर जांच के आदेश दिए हैं. उन्हें यात्रियों को नुकसान होने का शक है.
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने इंडिगो के खिलाफ गंभीर आरोपों को देखते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. यह मामला दिसंबर 2025 में हुई हजारों उड़ानों रद्द होन से जुड़ा है, जिससे देशभर के यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था.
CCI का मानना है कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इंडिगो ने अपनी बड़ी बाजार हिस्सेदारी का फायदा उठाते हुए एक साथ बड़ी संख्या में फ्लाइट्स रद्द कर दी थी. इससे हवाई यात्रा में कमी पैदा हुई और पीक सीजन के दौरान यात्रियों के पास सीमित विकल्प ही बचे. CCI ने इसे प्रतिस्पर्धा कानून के तहत सेवाओं को जानबूझकर सीमित करने वाला फैसला माना है.
CCI ने क्या कहा?
CCI के 16 पेज के आदेश में कहा गया है कि इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी लगभग 60 से 65 प्रतिशत है. इतनी बड़ी पकड़ रखने वाली कंपनी अगर अचानक हजारों उड़ानें रद्द करती है तो इसका सीधा नुकसान यात्रियों को होता है और पूरे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ता है. CCI को शक है कि उड़ानों के रद्द होने के बाद सीटों की कमी बनी रही और इसी दौरान टिकट के दाम बढ़ गए. अब यह जांच की जाएगी कि क्या यात्रियों को मजबूरी में महंगे टिकट खरीदने पर मजबूर किया गया.
दिसंबर में क्या हुआ था?
दिसंबर 2025 की शुरुआत में इंडिगो ने करीब 4,500 उड़ानें रद्द कर दी थीं. कंपनी ने इसकी वजह पायलट रोस्टर प्लानिंग में गड़बड़ी और DGCA के नए पायलट रेस्ट नियमों को बताया था. इसका नतीजा यह हुआ कि 3 लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए, टिकटों के दाम बढ़ गए और कई एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई. इस मामले के बाद जनवरी में DGCA ने इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था और एयरलाइन को अपना विंटर शेड्यूल 10 प्रतिशत तक घटाने का आदेश दिया था.
अब आगे क्या होगा?
अब CCI ने यह मामला डायरेक्टर जनरल (DG) को सौंप दिया है. DG यह जांच करेगा कि क्या इंडिगो ने अपनी बड़ी बाजार हिस्सेदारी का गलत इस्तेमाल किया और क्या इससे यात्रियों और प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा.

