R Mahavan On 4 Years Break: धुरंधर एक्टर आर माधवन ने अपने करियर के पीक पर फिल्म इंडस्ट्री से चार साल का ब्रेक ले लिया था. वहीं अब उन्होंने इसकी असल वजह का खुलासा किया है.
आर माधवन इन दिनों ब्लॉकबस्टर धुरंधर में अहम किरदार निभाकर खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं. वहीं क्या आप जानते हैं कि एक्टर ने अपने करियर के पीक पर चार साल का ब्रेक ले लिया था. वहीं एक्टर ने अब एक इंटरव्यू में खुलकर बताया है कि उन्होंने अपनी पॉपुलैरिटी के पीक पर फिल्मों से दूरी क्यों बनाई थी?
आर माधवन ने साल 2011 में एक्टिंग से ब्रेक लिया था और 2016 में ‘साला खडूस’ से वापसी तक सिल्वर स्क्रीन दूर रहे. यह फिल्म उनके पहले के करियर के रोमांटिक रोल से बिल्कुल अलग थी.
आर माधवन ने चार साल का ब्रेक क्यों लिया था?
अनफिल्टर्ड एंटरटेनमेंट के साथ हाल ही में हुई बातचीत में आर माधवन ने बताया कि यह एहसास उन्हें विदेश में शूटिंग के दौरान हुआ. “विक्रम वेधा मुझे एक ब्रेक के बाद मिली. साला खडूस से पहले, मुझे ब्रेक लेना पड़ा क्योंकि मैं जिस तरह का काम कर रहा था, उससे बहुत निराश था. मैं स्विट्जरलैंड में एक तमिल गाने के लिए नारंगी पैंट और हरी शर्ट पहनकर शूटिंग कर रहा था.”
उन्होंने आगे कहा, “मैं सड़क के बीच में था और मैंने एक स्विस किसान को वहां बैठे देखा, जो हमें पूरी नफ़रत से देख रहा था. वह चाय की चुस्की ले रहा था और सोच रहा था कि हम क्या कर रहे हैं. मैंने उसे देखा और सोचा कि तुम चेन्नई आओ, मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि मैं कौन हूं.”
दूसरों की धुनों पर नाचने का एहसास हुआ
उस मुलाकात ने माधवन को एक एक्टर के तौर पर अपनी पसंद के बारे में एक मुश्किल सच का सामना करने पर मजबूर कर दिया था. उन्होंने कहा, “मुझे सच में बहुत बुरा लगा, लेकिन फिर अचानक मुझे एहसास हुआ. मैं सचमुच दूसरों की धुन पर नाच रहा हूं, मैं एक पब्लिक स्पीकर हूं, मुझे बंदूक चलाना आता है, रिमोट प्लेन उड़ाना आता है, घोड़े की सवारी करना आता है, मैं बहुत कुछ करता हूं, लेकिन मैं अपनी फिल्मों में इनमें से कुछ भी नहीं दिखा रहा हूं.”
उन्होंने कहा “मैं सिर्फ़ दर्शकों को लुभाने की कोशिश कर रहा था, जिससे मैं एक सुपरस्टार बन जाऊं. मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ.”
जो लोग उनके सबसे करीब थे, उन्हें भी यह दूरी महसूस हो रही थी. माधवन ने याद किया कि उनकी पत्नी, सरिता बिर्जे ने उनकी बढ़ती असंतुष्टि को नोटिस किया था. उन्होंने अपने कुछ किरदारों के बारे में सोचते हुए कहा, “यहां तक कि जो किरदार मैं निभा रहा था… जैसे एक भूखा, अनपढ़ गांव का लड़का जो क्रिकेट में अपना करियर बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है. मेरा मतलब है, किसी भी एंगल से अरविंद स्वामी ऐसे नहीं लगते कि हम अनपढ़ हैं या खाने के लिए भूखे हैं. ये सब गलत चीजें थीं.”
घर पर हुई एक बातचीत टर्निंग पॉइंट बन गई
माधवन ने आगे कहा, “एक दिन, मेरी पत्नी ने मुझसे पूछा, ‘तुम्हें क्या हुआ है?’ उसने कहा कि तुम काम पर ऐसे जाते हो जैसे तुम वहां से वापस आना चाहते हो. उस बात में सच में बहुत दम था.” उन्होंने कहा, और थानी ओरुवन के तेलुगु रीमेक का उदाहरण दिया, जो उन्हें लॉजिकली गलत लग रहे थे.
चार साल के ब्रेक में खुद को कर लिया था इंडस्ट्री से दूर
अपने चार साल के ब्रेक के दौरान, माधवन ने जानबूझकर खुद को इंडस्ट्री से दूर कर लिया था. उन्होंने इस बारे में कहा, “तो, मैंने एक ब्रेक लिया. मैं समझना चाहता था कि देश किस दिशा में जा रहा है. मैंने एड फिल्में करना भी बंद कर दिया, दाढ़ी बढ़ा ली, चेन्नई और भारत की दूसरी जगहों पर बहुत यात्रा की. मैंने रिक्शा वालों से बात की, उनके लिए सच में क्या मायने रखता है, उन्हें परेशान करने वाली चीजों की असली कीमत क्या है.”
पीछे मुड़कर देखने पर, उन्हें लगता है कि उस दौर ने उन्हें आज का एक्टर बनाया है. उन्होंने इसे लके करगा “चार साल की वह समझ ही शायद आज मेरे काम आ रही है।”
कमबैक करने पर बदल गया फिल्ममेकिंग के प्रति नजरिया
जब वह आखिरकार लौटे, तो माधवन ने कहा कि फिल्ममेकिंग के प्रति उनका नज़रिया पूरी तरह बदल गया था. उन्होंने कहा कि “जब मैं वापस आया, तो मुझे एहसास हुआ कि मेरे फिल्ममेकर, जो मेरे साथ फिल्में बना रहे थे, वे मेरे जितने आगे की सोच वाले नहीं थे. कहानी कहने की उनकी काबिलियत अभी भी अपने गुरुओं को इम्प्रेस करने तक ही सीमित थी. मैंने नए डायरेक्टर ढूंढना शुरू किया.”
इस बदलाव की वजह से उनमें एक बड़ा बदलाव आया, और माधवन ने विक्रम वेधा, शैतान, केसरी 2, दे दे प्यार दे 2 और धुरंधर जैसी फिल्मों में कई तरह के, परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड रोल किए.
पद्म श्री से किए गए सम्मानित
बता दें कि गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर आर माधवन को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. यह पुरस्कार तमिल, हिंदी और तेलुगु फिल्मों में उनके 25 साल से ज़्यादा के करियर को मान्यता देता है. माधवन ने इस सम्मान को “मेरे सबसे बड़े सपनों से भी परे” बताया.

