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Sunday, February 8, 2026
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बिना दवा कंट्रोल करें एंग्जायटी, अमेरिकी डॉक्टर ने बताईं स्ट्रेस घटाने वाली 6 डेली हैबिट्स

एक्सपर्ट के अनुसार सुबह की धूप शरीर की स्लीप वेक साइकिल को सही करने में मदद करती है. सुबह जल्दी धूप लेने से मेलाटोनिन हार्मोन बैलेंस रहता है, जिससे मूड बेहतर होता है और एंग्जायटी के लक्षण कम होते हैं.

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्ट्रेस और एंग्जायटी आम समस्या बनती जा रही है. कई बार यह धीरे-धीरे रोजाना की जिंदगी का हिस्सा बन जाती है. हालांकि हर बार इससे उभरने के लिए दवाइयों की जरूरत नहीं होती है. अमेरिकी डॉक्टर के अनुसार अगर रोज की कुछ आदतों में छोटे बदलाव किए जाएं तो एंग्जायटी और स्ट्रेस को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. उनका मानना है कि जि स्लीप, खान-पान, मूवमेंट और स्क्रीन टाइम बैलेंस में आते हैं तो एंग्जायटी अपने आप कम होने लगती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि कौन सी छह डेली हैबिट्स से आप स्ट्रेस कम कर सकते हैं.

एक्सपर्ट के अनुसार सुबह की धूप शरीर की स्लीप वेक साइकिल को सही करने में मदद करती है. सुबह जल्दी धूप लेने से मेलाटोनिन हार्मोन बैलेंस रहता है, जिससे मूड बेहतर होता है और एंग्जायटी के लक्षण कम होते हैं. वहीं कई रिसर्च में भी सामने आया है कि सुबह की रोशनी में समय बिताने से पॉजिटिव मूड बढ़ता है और एंग्जायटी का खतरा कम होता है.

एक्सपर्ट के अनुसार सुबह की धूप शरीर की स्लीप वेक साइकिल को सही करने में मदद करती है. सुबह जल्दी धूप लेने से मेलाटोनिन हार्मोन बैलेंस रहता है, जिससे मूड बेहतर होता है और एंग्जायटी के लक्षण कम होते हैं. वहीं कई रिसर्च में भी सामने आया है कि सुबह की रोशनी में समय बिताने से पॉजिटिव मूड बढ़ता है और एंग्जायटी का खतरा कम होता है.

इसके अलावा लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार जब खाने में ज्यादा गैप होता है तो एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना और बेचैनी महसूस हो सकती है. समय पर और नियमित खाना खाने से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है और एंग्जायटी कम होती है.

इसके अलावा लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार जब खाने में ज्यादा गैप होता है तो एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना और बेचैनी महसूस हो सकती है. समय पर और नियमित खाना खाने से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है और एंग्जायटी कम होती है.

वहीं एक्सपर्ट के अनुसार रोजाना अच्छी और पूरी नींद लेना मानसिक सेहत के लिए बहुत जरूरी है. नींद पूरी न होने पर दिमाग का इमोशनल कंट्रोल कमजोर पड़ जाता है, जिससे एंग्जायटी बढ़ सकती है. रिसर्च बताती है कि नींद की क्वालिटी सुधारने से एंग्जायटी के लक्षणों में साफ कमी आती है, जबकि कम नींद एंग्जायटी का खतरा बढ़ाती है.

वहीं एक्सपर्ट के अनुसार रोजाना अच्छी और पूरी नींद लेना मानसिक सेहत के लिए बहुत जरूरी है. नींद पूरी न होने पर दिमाग का इमोशनल कंट्रोल कमजोर पड़ जाता है, जिससे एंग्जायटी बढ़ सकती है. रिसर्च बताती है कि नींद की क्वालिटी सुधारने से एंग्जायटी के लक्षणों में साफ कमी आती है, जबकि कम नींद एंग्जायटी का खतरा बढ़ाती है.

ज्यादा चाय-कॉफी पीना भी एंग्जायटी को बढ़ा सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि कैफीन नर्वस सिस्टम को ज्यादा एक्टिव कर देता है, जिससे घबराहट, बेचैनी और पैनिक जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं. खासतौर पर जो लोग पहले से एंग्जायटी से जूझ रहे हैं, उनमें कैफीन की ज्यादा मात्रा नुकसान कर सकती है. कैफीन कम करने से एंग्जायटी और नींद दोनों में सुधार होता है.

ज्यादा चाय-कॉफी पीना भी एंग्जायटी को बढ़ा सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि कैफीन नर्वस सिस्टम को ज्यादा एक्टिव कर देता है, जिससे घबराहट, बेचैनी और पैनिक जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं. खासतौर पर जो लोग पहले से एंग्जायटी से जूझ रहे हैं, उनमें कैफीन की ज्यादा मात्रा नुकसान कर सकती है. कैफीन कम करने से एंग्जायटी और नींद दोनों में सुधार होता है.

लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से भी शरीर में टेंशन बढ़ती है, जो एंग्जायटी को और बढ़ा सकती है. वहीं एक्सपर्ट के अनुसार काम के बीच-बीच में हल्की फिजिकल एक्टिविटी या थोड़ी देर टहलना फायदेमंद होता है. सिर्फ 10 मिनट की वॉक भी मूड बेहतर करने और एंग्जायटी कम करने में मदद करती है.

लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से भी शरीर में टेंशन बढ़ती है, जो एंग्जायटी को और बढ़ा सकती है. वहीं एक्सपर्ट के अनुसार काम के बीच-बीच में हल्की फिजिकल एक्टिविटी या थोड़ी देर टहलना फायदेमंद होता है. सिर्फ 10 मिनट की वॉक भी मूड बेहतर करने और एंग्जायटी कम करने में मदद करती है.

इसके अलावा डॉक्टर का कहना है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल स्ट्रेस और एंग्जायटी से जुड़ा हुआ है. लगातार नोटिफिकेशन, देर रात मोबाइल चलाना और स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से दिमाग थकता है. स्क्रीन टाइम कम करने, नोटिफिकेशन लिमिट करने और कुछ समय के लिए टेक्नोलॉजी से दूर रहने से मेंटल वेल-बीइंग और नींद की क्वालिटी बेहतर होती है.

इसके अलावा डॉक्टर का कहना है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल स्ट्रेस और एंग्जायटी से जुड़ा हुआ है. लगातार नोटिफिकेशन, देर रात मोबाइल चलाना और स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से दिमाग थकता है. स्क्रीन टाइम कम करने, नोटिफिकेशन लिमिट करने और कुछ समय के लिए टेक्नोलॉजी से दूर रहने से मेंटल वेल-बीइंग और नींद की क्वालिटी बेहतर होती है.

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