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Wednesday, January 21, 2026
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पैसा रखे हैं न तैयार? जानें कब लॉन्च होने जा रहा ‘मदर ऑफ आईपीओ’, सरकारी नोटिफिकेशन के मिलने का इंतजार

Reliance Jio IPO: मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) धीरे-धीरे स्टॉक मार्केट डेब्यू के करीब पहुंच रही है. इसे मदर ऑफ आईपीओ भी कहा जा रहा है.

Reliance Jio IPO: मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की अगुवाई वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) की जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) धीरे-धीरे स्टॉक मार्केट डेब्यू के करीब पहुंच रही है. कंपनी को फिलहाल आईपीओ को लेकर बदले हुए नियमों पर सरकार की तरफ से फाइनल नोटिफिकेशन के मिलने का इंतजार है.

इसके मिलने तक कंपनी अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को ऑफिशियल तरीके से फाइल करने से बच रही है. एक बार मंजूरी मिल गई तो यह आने वाले समय में देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन सकता है. आईपीओ का साइज अनुमानित ढंग से 4–4.5 बिलियन डॉलर (लगभग 33,000–37,000 करोड़ रुपये) के बीच हो सकता है.

थोड़े और समय का इंतजार
RIL के दिसंबर तिमाही के नतीजे के दौरान RIL के SVP (स्ट्रैटेजी और प्लानिंग) अंशुमन ठाकुर ने कहा कि कंपनी अंदरूनी तौर पर IPO की तैयारी कर रही है, लेकिन सरकार से फाइनल नोटिफिकेशन के मिलने का इंतजार है. उन्होंने आगे कहा कि कंपनी अभी इस अनुमान पर काम कर रही है कि नियम SEBI की सिफारिशों के मुताबिक होंगे.

अंशुमन ठाकुर ने कहा, “हम इस अनुमान पर काम कर रहे हैं कि यह SEBI की सिफारिशों के मुताबिक होगा, लेकिन हमें इसे फाइनल करने और फिर प्रोसेस शुरू करने से पहले इसका इंतजार करना होगा.” उन्होंने आगे कहा कि “सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन के मिलते ही अगले कुछ महीनों में इसे लॉन्च कर दिया जाएगा.

क्या है सेबी का नया नियम?
सितंबर 2025 में मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 50000 करोड़ रुपये से से एक लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली कंपनियों के लिए IPO में मिनिमम डाइल्यूशन को घटाकर 2.5 परसेंट तक करने की सिफारिश की थी. यानी कि जिन कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 50,000 करोड़ से एक लाख करोड़ रुपये (लिस्टिंग के बाद) होगा, उन्हें 25 परसेंट तक मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियम का पालन के लिए 5 साल का समय मिलेगा. जबकि अभी इसके लिए 3 साल का समय मिलता है.जिन कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन लिस्टिंग के बाद 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा, उन्हें मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियम के पालन के लिए 10 साल का वक्त मिलेगा.

मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग का मतलब है कि किसी भी लिस्टेड कंपनी के कम से कम 25 परसेंट शेयर आम निवेशकों के पास होने चाहिए. इससे प्रमोटरों का दबदबा कम होगा और बाजार में शेयरों की उपलब्धता बढ़ेगी.

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