
Patna NEET Student Death:
पटना के मुन्नाचक इलाके स्थित शंभू हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। 6 जनवरी को छात्रा अपने कमरे में बेहोशी की हालत में मिली थी। हॉस्टल कर्मचारियों ने अगले तीन दिनों में उसे तीन अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया। शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में नींद की दवा के ओवरडोज की बात कही गई, जिसके चलते छात्रा कोमा में चली गई। इलाज के दौरान 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई।
हालांकि, बाद की जांच में मामला कहीं ज्यादा गंभीर होता दिखा। रिपोर्ट में छात्रा के शरीर और प्राइवेट पार्ट्स पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आई, जिससे शुरुआती मेडिकल निष्कर्षों पर सवाल उठने लगे। इस बीच डॉक्टरों की लापरवाही के साथ-साथ पुलिस की कार्यप्रणाली भी कटघरे में आ गई। 6 से 9 जनवरी तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची और बताया गया कि शिकायत भी 9 जनवरी को दर्ज की गई। इसके बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि छात्रा के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान न तो हॉस्टल को सील किया गया और न ही उस कमरे को सुरक्षित किया गया जहां वह बेहोश मिली थी। इन जगहों से अहम सबूत मिलने की संभावना थी, लेकिन पुलिस ने न फॉरेंसिक टीम बुलाई और न ही साक्ष्य जुटाने की कोशिश की।
एबीपी न्यूज़ की पड़ताल में सामने आया है कि इस मामले में एक-दो नहीं बल्कि पांच स्तरों पर गंभीर लापरवाही हुई। इसमें डॉक्टरों से लेकर स्थानीय पुलिस अधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तक शामिल हैं। आरोप यह नहीं कि इन लोगों ने सीधे तौर पर छात्रा की जान ली, बल्कि यह कि लापरवाही और जल्दबाजी में दिए गए बयानों से मामले की निष्पक्ष जांच को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
डॉक्टरों द्वारा शुरुआती रिपोर्ट को स्पष्ट न रखते हुए यौन शोषण की आशंका को खारिज करना, थाना स्तर पर बिना गहन जांच निष्कर्ष निकालना और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पहले बयान देना—इन सभी ने मिलकर इस केस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

