Budget 2026: बजट में कैपेक्स में फिर से बढ़ोतरी के संकेत नजर आने वाले हैं क्योंकि गुजरे दो-तीन सालों में निवेश से कई सेक्टर्स को बढ़ावा मिला है. अब सरकार के साथ निजी कंपनियां भी निवेश करने लगी हैं.
Budget 2026: बजट 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, रविवार को देश का आम बजट पेश करेंगी. यह देश के आजाद होने के बाद से संसद में पेश होने वाला 88वां बजट होगा. साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का नौवां बजट भी होगा. बताया जा रहा है कि सरकार नए बजट में कैपेक्स पर अपना फोकस बनाए रख सकती है. FY26 के लिए कैपेक्स की रकम 11.21 लाख करोड़ रुपये रखी गई है, जिसमें 10-15 परसेंट तक का इजाफा हो सकता है.
कैपेक्स पर कितनी बढ़ाई जाएगी खर्च?
एक्सपर्ट्स का कहना है, आने वाले बजट में कैपेक्स पर खर्च बढ़ाने की काफी गुंजाइश है. PwC के पार्टनर और इकोनॉमिक एडवाइजरी सर्विसेज के लीडर राणेन बनर्जी ने PTI को बताया, “मेरा मानना है कि इकॉनमी में कैपिटल खर्च को इस्तेमाल करने की क्षमता बहुत ज्यादा नहीं है. अगर आप इसे रातों-रात 30 परसेंट बढ़ाना चाहेंगे, तो ऐसा होने वाला नहीं है क्योंकि आपको कंस्ट्रक्शन कंपनियों की क्षमता चाहिए, आपको भारी अर्थ-मूविंग मशीनरी की क्षमता चाहिए, आपको बहुत सारी मशीनें चाहिए इसलिए यह रातों-रात 30 परसेंट तक नहीं बढ़ सकता है. मेरा मानना है कि कैपेक्स में लगभग 10 परसेंट तक की बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है. हम इसके लिए लगभग 12 ट्रिलियन रुपये अलॉट किए जाने की उम्मीद लगा रहे हैं.”
1 फरवरी को आने वाला यूनियन बजट कैपेक्स ट्रेड के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है, जिसने पिछले एक साल में अपनी रफ्तार खो दी थी. सरकार के कारोबारी साल 2026 के शुरुआती छह महीनों में खर्च बढ़ाया, तो काम में भी सामान्य रूप से ग्रोथ होता नजर आया. अब निवेशकों को नए बजट में इस ओर सरकार के रूख का इंतजार है. हाल के संकेतों से यह भी पता चला है कि सरकार वित्तीय अनुशासन को बनाए रखेगी इसलिए कैपेक्स पर बहुत ज्यादा खर्च होने का अनुमान कम ही है. बजट के दौरान हर बार की ही तरह लोगों की नजर डिफेंस, रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर पर टिकी रहेगी.
कैपेक्स क्या है?
कैपेक्स या Capital Expenditure उन खर्चों को कहा जाता है, जिन्हें सरकार सड़कें, पुल, रेलवे, अस्पताल जैसे अपनी लॉन्ग-टर्म संपत्तियों पर करती है. कैपेक्स जितना ज्यादा होगा, इन सेक्टर्स पर खर्च भी उतने ही बड़े पैमाने पर होगा. इससे इनका विकास होगा, तो कहीं न कहीं देश की आर्थिक क्षमता भी बढ़ेगी.
कारोबारी साल 2025-26 के शुरुआती छह महीनों में कैपेक्स टोटल 5.80 लाख करोड़ रुपये का रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 40 परसेंट ज्यादा है. पिछले साल अपने एक इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा था कि सरकार का फोकस कैपेक्स पर पहले भी थी अब भी है. कैपेक्स के तहत सबसे ज्यादा खर्च सड़क परिवहन और राजमार्ग और रेलवे पर हो रहा है. इनके अलावा, रिन्यूएबल एनर्जी, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स जैसे सेगमेंट्स में भी खर्च बढ़ रहे हैं.
रेल या डिफेंस कौन सबसे आगे?
बजट में डिफेंस सेक्टर के सबसे ज्यादा फायदे में रहने की उम्मीद लगाई जा रही है. ब्रोकरेज मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि FY27 में डिफेंस पर खर्च अनुमानित 1.8 लाख करोड़ रुपये के बेस से 15 परसेंट बढ़ जाएगा. इस सेक्टर को इमरजेंसी परचेज, स्वेदशीकरण पर जोर और इंडस्ट्री के लिए बढ़ती एलोकेशन से मजबूती मिल रही है.
रेलवे पर भी खर्च बढ़ने की उम्मीद है. सरकार सुरक्षा, बेहतर सिग्नलिंग और नई गाड़ियों की खरीद पर फोकस में रख सकती है. इनके अलावा, सड़कें, आवास और रेलवे के बाकी बड़े सेगमेंट के लिए अलॉटमेंट मामूली रहने की उम्मीद है.

