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Thursday, January 15, 2026
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दिल्ली में डल लेक जैसा लेना है मजा? इस घाट पर मात्र 100 रुपये में मिलेगी पूरी वाइब

दिल्ली में यमुना के कई घाट है, ऐसे में सही घाट पर पहुंचना जरूरी है. वहीं बोटिंग और पक्षियों को दाना डालने वाला घाट वही है, जिसके पास धर्म संघ गौ सेवा सदन स्थित है.


दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच यमुना नदी के किनारे एक ऐसी जगह भी है, जहां सुबह का सुकून, पक्षियों की उड़ान और नदी की ठंडी हवा एक अलग ही दुनिया का अहसास कराती है. कश्मीरी गेट के पास स्थित यमुना घाट इन दिनों लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है. यहां सूर्योदय के समय का नजारा, बोटिंग और फोटोग्राफी का एक्सपीरियंस डल लेक जैसे हिल स्टेशन से कम नहीं लगता है.


दिल्ली के यमुना घाट पर पहुंचने का सबसे आसान तरीका मेट्रो है. कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के बाद आप ऑटो, ई-रिक्शा या पैदल घाट तक जा सकते हैं. ऑटो का किराया करीब 60 से 80 रुपये और ई-रिक्शा 10 से 20 रुपये प्रति व्यक्ति होता है.


दिल्ली में यमुना के कई घाट है, ऐसे में सही घाट पर पहुंचना जरूरी है. वहीं बोटिंग और पक्षियों को दाना डालने वाला घाट वही है, जिसके पास धर्म संघ गौ सेवा सदन स्थित है. यही वह जगह है जहां सबसे ज्यादा लोग सुबह-सुबह पहुंचते हैं.


यमुना घाट पर खासकर सर्दियों की सुबह में पहुंचते ही यमुना नदी पर छाई हल्की धुंध और आसमान के रंग बदलते शेड्स दिल जीत लेते हैं. यहां सुबह के समय एक तरफ नारंगी और दूसरी तरफ नीला आसमान देखने को मिलता है, जिसे लोग अपने कैमरे में कैद करने आते हैं.


वहीं यमुना घाट पर बड़ी संख्या में लोग सीगल्स को दाना डालते दिखाई देते हैं. जैसे ही नदी में खाना डाला जाता है, सैकड़ों पक्षी उड़कर पास आ जाते हैं, जो देखने में बेहद खूबसूरत लगता है.


यह घाट युवाओं, फोटोग्राफर्स और प्री-वेडिंग शूट के लिए भी पसंदीदा बन चुका है. सुबह-सुबह यहां गिटार बजाते, गाने गाते और तस्वीरें खींचते लोग अक्सर दिखाई देते हैं.


यमुना घाट पर बोटिंग भी की जा सकती है. आमतौर पर वीकेंड पर बोटिंग का किराया 100 रुपये प्रति व्यक्ति होता है. पहले यह 50 रुपये था, जबकि वीकडेज पर किराया थोड़ा कम होता है.


बोटिंग के जरिए यमुना के दूसरे किनारे भी जाया जा सकता है. यह हिस्सा ज्यादा खुला है और यहां से पुल तक पैदल घूमने का मौका मिलता है. वापस आने के लिए वहां से नाव ही एकमात्र साधन होता है.
यमुना घाट सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अहम है. यहां पूजा-पाठ, अंतिम संस्कार और धार्मिक अनुष्ठान सदियों से होते आ रहे हैं.

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