
Iran Protest: ईरान ने अमेरिकी हमले पर पड़ोसी देशों में मौजूद US सैन्य कैंप को निशाना बनाने की चेतावनी दी है. इसको देखते हुए कतर के अल उदीद एयर बेस से अमेरिका-ब्रिटेन ने सैन्य कर्मियों को हटा लिया है.
ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुली धमकियों के बावजूद तेहरान झुकता नजर नहीं आ रहा है. ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने सैन्य हमला किया, तो वह उन पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा, जहां अमेरिकी सेना मौजूद है. इस चेतावनी के बाद एहतियातन अमेरिका और ब्रिटेन ने कतर स्थित अल उदीद एयर बेस से अपने कुछ सैन्य और असैन्य कर्मियों को हटा लिया है, जिससे क्षेत्र में युद्ध की आशंका और गहरा गई है.
पश्चिमी देशों की सैन्य क्षमता की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया घटनाक्रम इस ओर इशारा कर रहा है कि ईरान पर अमेरिका हमला कर सकता है. इसी आशंका के चलते भारत, पोलैंड और इटली समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की एडवाइजरी जारी की है. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक अब तक करीब 3,000 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि मृतकों की संख्या लगभग 2,600 है.
ट्रंप की खुली धमकियां और कूटनीतिक दबाव
डोनाल्ड ट्रंप बीते कई दिनों से खुले तौर पर ईरान में दखल देने की धमकी दे रहे हैं. उन्होंने ईरानियों से प्रदर्शन जारी रखने और सरकारी संस्थाओं पर कब्जा करने की अपील की. ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकों को रद्द कर दिया है. इसके साथ ही उन्होंने चेताया है कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ खूनी कार्रवाई नहीं रोकी तो उस पर अतिरिक्त टैरिफ और प्रतिबंध लगाए जाएंगे.
अगले 24 घंटे निर्णायक? सैन्य कार्रवाई की आशंका
कुछ यूरोपीय और इजरायली अधिकारियों का दावा है कि अगले 24 घंटों के भीतर अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ब्रिटेन ने कतर के एयर बेस से अपने कर्मियों को हटाना शुरू कर दिया है. कतर सरकार ने कहा है कि यह कदम क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए उठाया गया है. पेंटागन का कहना है कि अगर अमेरिका ईरान पर सैन्य हमला करता है तो वह सीमित स्तर का होगा और यह हाल के महीनों में ईरान पर दूसरा हमला होगा. फिलहाल यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर, कई एस्कॉर्ट युद्धपोत और तीन मिसाइल दागने वाले डिस्ट्रॉयर पहले से ही क्षेत्र में तैनात हैं.
ईरान की चेतावनी
एक ईरानी अधिकारी ने बताया कि तेहरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और तुर्किए से अपील की है कि वे अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकें. अधिकारी ने साफ कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान को निशाना बनाया तो इन देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमला किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकाफ के बीच सीधा संपर्क बंद कर दिया गया है. ईरानी मीडिया के अनुसार, सुरक्षा परिषद प्रमुख अली लारीजानी ने कतर के विदेश मंत्री से बात की, जबकि अराकची ने UAE और तुर्किए के अपने समकक्षों से संपर्क किया है.
संयुक्त राष्ट्र को पत्र, अमेरिका पर आरोप
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासचिव को पत्र लिखकर अमेरिका पर हिंसा भड़काने, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है. अराकची ने UAE के विदेश मंत्री से कहा कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. इस बीच ईरान के प्रधान न्यायाधीश गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई ने तेहरान की एक जेल का दौरा किया, जहां प्रदर्शनकारियों को रखा गया है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सिर कलम किया या लोगों को जलाया, उन्हें सजा देना जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार अब तक 18,137 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.

