
Kolkata ED Raid: हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. इसके बाद से यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या पश्चिम बंगाल पुलिस ईडी अधिकारियों के खिलाफ वास्तव में कोई कार्रवाई कर सकती है या नहीं. ईडी की छापेमारी के बाद तृणमूल कांग्रेस ने दिल्ली से कोलकाता तक विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं, वहीं खुद ममता बनर्जी ने भी कोलकाता में विरोध मार्च का नेतृत्व किया.
ईडी की यह छापेमारी तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल प्रमुख से जुड़े ठिकानों पर हुई थी, जिसके बाद राजनीतिक टकराव और तेज हो गया. ममता बनर्जी द्वारा दो एफआईआर दर्ज कराए जाने से मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी बहस का भी विषय बन गया है.
क्या बंगाल पुलिस ईडी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है?
कानूनी तौर पर राज्य पुलिस ईडी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, लेकिन इसके लिए कुछ अहम शर्तें हैं. अगर किसी ईडी अधिकारी पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी या आधिकारिक ड्यूटी से हटकर आपराधिक कृत्य करने का आरोप साबित होता है, तो राज्य पुलिस या सीबीआई जैसी एजेंसियां मामला दर्ज कर सकती हैं और कार्रवाई भी संभव है.
क्या ईडी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा मिली है?
ईडी अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 197 के तहत कानूनी सुरक्षा प्राप्त है. इस प्रावधान के अनुसार, किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ उसकी आधिकारिक ड्यूटी के दौरान किए गए कार्यों को लेकर मुकदमा चलाने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होती है. हालांकि यह सुरक्षा केवल तभी लागू होती है, जब कथित कार्य सीधे आधिकारिक जिम्मेदारी से जुड़ा हो. अगर आरोप जबरन वसूली, निजी लाभ या किसी तरह के व्यक्तिगत दुराचार से जुड़े हों, तो यह सुरक्षा लागू नहीं होती.
हालांकि बंगाल पुलिस एफआईआर दर्ज कर सकती है, लेकिन ईडी अधिकारियों के खिलाफ किसी ठोस कार्रवाई के लिए अदालत की मंजूरी और केंद्र सरकार की अनुमति अहम भूमिका निभाती है. यह भी इस बात पर निर्भर करेगा कि आरोपित कार्य आधिकारिक कर्तव्य के दायरे में आते हैं या नहीं.
ईडी की शक्तियों पर अदालतों की टिप्पणी
बीते कुछ वर्षों में ईडी की शक्तियों को लेकर न्यायिक निगरानी बढ़ी है. 2025 और 2026 के दौरान अदालतों ने स्पष्ट किया कि ईडी मनमाने ढंग से गिरफ्तारियां नहीं कर सकती. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गिरफ्तारी के लिए ठोस सबूत जरूरी हैं. वहीं, 2025 में मद्रास हाई कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी कि ईडी कोई “सुपर कॉप” नहीं है और वह तभी कार्रवाई कर सकती है, जब किसी अन्य एजेंसी द्वारा पहले से कोई अपराध दर्ज किया गया हो.

