
Dementia Symptoms at Young Age: दुनिया में कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनके बारे में जानकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ऐसी ही एक दुर्लभ और खतरनाक बीमारी है यंग ऑनसेट डिमेंशिया, जिसने इंग्लैंड के नॉरफोक के डेरेहम में रहने वाले आंद्रे यारहम की बेहद कम उम्र में जिंदगी छीन ली।
आंद्रे की उम्र महज 22 साल थी, जब उनकी मां सामंथा फेयरबेयरन ने उनके व्यवहार में चिंताजनक बदलाव महसूस किए। उन्होंने देखा कि बेटा छोटी-छोटी बातें भूलने लगा है और कई बार उसका व्यवहार उम्र के हिसाब से असामान्य हो जाता है। इन बदलावों से परेशान होकर वे आंद्रे को डॉक्टर के पास ले गईं, जहां जांच के बाद जो सामने आया, उसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
डॉक्टरों ने बताई दुर्लभ बीमारी
जांच के बाद डॉक्टरों ने आंद्रे को फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया होने की पुष्टि की। यह डिमेंशिया का एक दुर्लभ प्रकार है, जो दिमाग में एक विशेष प्रोटीन म्यूटेशन के कारण होता है। इस बीमारी में न केवल याददाश्त प्रभावित होती है, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार, सोचने-समझने और बोलने की क्षमता पर भी तेजी से असर पड़ता है। ब्रेन स्कैन में आंद्रे के दिमाग के असामान्य रूप से सिकुड़ने के संकेत मिले, जिसके बाद उन्हें कैम्ब्रिज रेफर किया गया, जहां डिमेंशिया की अंतिम पुष्टि हुई।
24 साल की उम्र में मौत
आंद्रे यारहम की 24 साल की उम्र में इस गंभीर बीमारी के कारण मौत हो गई। एमआरआई रिपोर्ट में सामने आया कि उनका दिमाग 70 साल के व्यक्ति जैसा हो चुका था। BBC से बातचीत में उनकी मां ने बताया कि इतनी कम उम्र में बेटे को डिमेंशिया होना जानना बेहद दर्दनाक था। उन्होंने कहा कि यह बीमारी उम्र नहीं देखती और आंद्रे संभवतः सबसे कम उम्र के मरीजों में से एक था।
तेजी से बिगड़ती हालत
बीमारी बढ़ने के साथ परिवार के लिए आंद्रे की देखभाल करना बेहद कठिन हो गया। सितंबर में उन्हें केयर होम में शिफ्ट करना पड़ा और कुछ ही हफ्तों में वह व्हीलचेयर पर आ गए। मौत से करीब एक महीने पहले उन्होंने बोलने की क्षमता भी खो दी थी और केवल आवाजें निकाल पाते थे। हालांकि, उनकी मां के मुताबिक, बीमारी के आखिरी दौर तक आंद्रे की मुस्कान, ह्यूमर और व्यक्तित्व बना रहा।
रिसर्च के लिए दिमाग दान
27 दिसंबर को आंद्रे का निधन हो गया। मौत से पहले उन्होंने अपना दिमाग रिसर्च के लिए दान करने का फैसला किया, ताकि भविष्य में इस बीमारी की बेहतर समझ और इलाज विकसित किया जा सके। उनकी मां का कहना है कि अगर उनके बेटे का यह फैसला किसी एक परिवार को भी अपने प्रिय के साथ कुछ अतिरिक्त साल बिताने का मौका दे सके, तो यह उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि होगी।

