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Tuesday, January 13, 2026
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TECH EXPLAINED: लाइक से लेकर वॉच टाइम तक! कैसे सोशल मीडिया एल्गोरिदम तय करता है आपकी पूरी फीड? पूरा खेल समझिए

Social Media: जैसे ही आप किसी भी सोशल मीडिया ऐप को खोलकर स्क्रॉल करना शुरू करते हैं, समय का पता ही नहीं चलता.

पसंद का कंटेंट बार-बार कैसे दिखने लगता है?
जब एल्गोरिदम यह पहचान लेता है कि आपको किस तरह की चीजें पसंद हैं तो वही कैटेगरी का कंटेंट आपकी फीड में बार-बार दिखने लगता है. अगर आप क्रिकेट से जुड़े वीडियो ज़्यादा देखते हैं तो अगली बार ऐप खोलते ही क्रिकेट से जुड़ी पोस्ट्स की भरमार दिखेगी. यही वजह है कि एक बार स्क्रॉल शुरू करने के बाद रुकना मुश्किल हो जाता है.

एल्गोरिदम बिना नियम के नहीं चलता
हर सिस्टम को सही तरीके से काम करने के लिए नियमों की जरूरत होती है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी एल्गोरिदम के जरिए तय करते हैं कि किस यूज़र को क्या दिखाना है और क्या नहीं. यह आपकी भाषा, लोकेशन, रुचि और ऑनलाइन गतिविधि के आधार पर कंटेंट को फिल्टर करता है और फिर उसे फीड में सजाता है.

आसान शब्दों में एल्गोरिदम का मतलब
सरल भाषा में एल्गोरिदम एक ऐसा प्रोग्राम होता है, जो कंप्यूटर को बताता है कि किसी डेटा के साथ क्या करना है. टेक्निकल तौर पर यह कुछ नियमों का सेट होता है जिनके आधार पर जानकारी को प्रोसेस किया जाता है. सोशल मीडिया पर यही नियम तय करते हैं कि पोस्ट किस क्रम में दिखेंगी, सर्च रिज़ल्ट कैसे आएंगे और विज्ञापन किसे नजर आएंगे.

हर यूजर की फीड अलग क्यों होती है?
Facebook, Instagram या किसी भी प्लेटफॉर्म पर दो लोगों की फीड एक जैसी नहीं होती. ऐसा इसलिए क्योंकि एल्गोरिदम हर यूजर की एक्टिविटी अलग-अलग तरीके से समझता है. आप जिस तरह के अकाउंट्स से ज्यादा इंटरैक्ट करते हैं, वही कंटेंट आपको ऊपर दिखता है जबकि दूसरे पोस्ट नीचे चले जाते हैं.

एल्गोरिदम क्यों है इतना जरूरी?
आज दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रही है. हर इंसान की पसंद अलग होती है. अगर एल्गोरिदम न हो तो किसी को क्रिकेट की जगह कुकिंग वीडियो दिखेंगे और किसी को ट्रैवल के बजाय योगा. एल्गोरिदम ही तय करता है कि हर यूजर को उसकी पसंद का कंटेंट मिले.

एल्गोरिदम सीखता कैसे है आपकी आदतें?
एल्गोरिदम का काम भले ही जटिल हो लेकिन इसका मूल सिद्धांत आसान है. यह आपकी हर एक्टिविटी को ध्यान से देखता है. आप क्या देखते हैं, कितनी देर देखते हैं, क्या लाइक करते हैं, क्या शेयर करते हैं और किसे नजरअंदाज करते हैं—इन सब से एल्गोरिदम आपकी प्रोफाइल तैयार करता है. शुरुआत में फीड थोड़ी बेतरतीब लग सकती है लेकिन कुछ दिनों बाद ज्यादातर कंटेंट आपकी पसंद से मेल खाने लगता है.

Instagram और Facebook का एल्गोरिदम कैसे सोचता है?
Instagram पहले उन अकाउंट्स की पोस्ट दिखाता है जिन्हें आप फॉलो करते हैं. इसके बाद यह देखता है कि आप किन पोस्ट्स को लाइक, सेव या शेयर करते हैं. जिन पोस्ट्स पर ज्यादा लाइक और कमेंट आते हैं, उन्हें ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाता है. जिन अकाउंट्स से आप अक्सर जुड़ते हैं, उनका कंटेंट आपकी फीड में ऊपर दिखाई देता है. Facebook भी लगभग इसी तरह पोस्ट्स को रैंक करता है.

YouTube पर वीडियो कैसे होते हैं वायरल?
YouTube का एल्गोरिदम सिर्फ व्यूज़ नहीं देखता बल्कि यह भी जांचता है कि लोग वीडियो कितनी देर तक देख रहे हैं. अगर कोई वीडियो आखिर तक देखा जा रहा है या उसका वॉच टाइम अच्छा है तो उसे ज्यादा लोगों को सजेस्ट किया जाता है. इसके अलावा लाइक, कमेंट, शेयर और आपकी पुरानी वॉच हिस्ट्री भी बड़ी भूमिका निभाती है.

LinkedIn पर किस तरह का कंटेंट चलता है?
LinkedIn का एल्गोरिदम क्वालिटी को ज्यादा महत्व देता है. यहां पोस्ट की उपयोगिता, उसकी प्रासंगिकता और उस पर मिलने वाला एंगेजमेंट देखा जाता है. भरोसेमंद प्रोफाइल, पर्सनल कनेक्शन और लगातार एक्टिव रहने वाले यूज़र्स को ज्यादा रीच मिलती है.

X (Twitter) एल्गोरिदम किन बातों पर ध्यान देता है?
X का एल्गोरिदम आपकी भाषा, लोकेशन और इंटरैक्शन पर काम करता है. आप किन पोस्ट्स पर रिएक्ट करते हैं कितने एक्टिव हैं और अकाउंट कितना भरोसेमंद है ये सभी फैक्टर मायने रखते हैं. जो अकाउंट्स नियमित रूप से पोस्ट करते हैं और ज्यादा सक्रिय रहते हैं, उन्हें आमतौर पर बेहतर पहुंच मिलती है.

सोशल मीडिया पर जो कुछ भी आप देखते हैं, वह संयोग नहीं होता. एल्गोरिदम आपकी हर डिजिटल आदत को समझकर आपकी फीड तैयार करता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया आपको इतना बांधे रखता है. अगर आप चाहें तो अपनी पसंद और इंटरैक्शन बदलकर एल्गोरिदम को भी बदल सकते हैं.

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