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Tuesday, January 13, 2026
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Bail के बावजूद अटकी रिहाई: शरजील इमाम–उमर खालिद मामले में जानिए कानूनी कारण

Umar Khalid and Sharjeel Imam SC Verdict:
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि इसी मामले में अन्य पांच आरोपियों को जमानत दे दी गई। इस फैसले के बाद एक बार फिर यह सवाल उठता है कि कई बार जमानत मिलने के बावजूद भी आरोपियों की रिहाई क्यों अटक जाती है। आइए जानते हैं इसके पीछे की अहम वजहें।

जमानतदारों के वेरिफिकेशन में लगने वाला समय
जमानत के बाद रिहाई में देरी की सबसे बड़ी वजह जमानतदारों का सत्यापन होता है। कोर्ट द्वारा मांगे गए जमानतदारों की पहचान, पता और वित्तीय दस्तावेजों की पुलिस या राजस्व विभाग से फिजिकल जांच की जाती है। बड़े और संवेदनशील मामलों में यह प्रक्रिया कई दिन तक खिंच जाती है, जिससे आरोपी को जेल में ही रहना पड़ता है।

रिहाई वारंट जारी होने में देरी
जमानत आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट को जेल प्रशासन के लिए औपचारिक रिहाई वारंट (रिलीज मेमो) जारी करना होता है। सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट से आदेश की प्रमाणित प्रति ट्रायल कोर्ट तक पहुंचने और कागजी प्रक्रिया पूरी होने में आमतौर पर 1 से 3 दिन का समय लग जाता है।

आर्थिक मजबूरी भी बनती है बाधा
कई अंडरट्रायल कैदी जमानत की तय राशि या बॉन्ड भरने में असमर्थ होते हैं। जमानत मिलने के बावजूद यदि आरोपी पैसे या गारंटर का इंतजाम नहीं कर पाता, तो उसे जेल में ही रहना पड़ता है।

अन्य पेंडिंग केस रिहाई में रोड़ा
अगर आरोपी के खिलाफ एक से ज्यादा मामले दर्ज हैं, तो हर मामले में अलग-अलग जमानत जरूरी होती है। किसी एक केस में जमानत मिलने के बावजूद जब तक बाकी मामलों में भी राहत नहीं मिलती, तब तक रिहाई संभव नहीं होती। यूएपीए और विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों में यह स्थिति आम है।

तकनीकी आपत्तियों से भी होती है देरी
कई बार जेल प्रशासन जमानत आदेश की भाषा या फॉर्मेट को लेकर तकनीकी आपत्तियां उठाता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी आपत्तियों की आलोचना करते हुए साफ कहा है कि जेल अधिकारी न्यायिक आदेशों में बाधा नहीं डाल सकते, लेकिन इसके बावजूद हाई-प्रोफाइल मामलों में देरी देखी जाती है।

वीकेंड और छुट्टियां बढ़ा देती हैं इंतजार
यदि जमानत का आदेश शुक्रवार शाम, वीकेंड या अदालत की छुट्टियों के आसपास आता है, तो रिहाई अगले कार्यदिवस तक टल जाती है, जिससे कैदी को अतिरिक्त दिन जेल में बिताने पड़ते हैं।

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