
AI से होमवर्क में सुधार, लेकिन नकल पकड़ने में भी टीचर्स अलर्ट
देश के कई स्कूलों में हाल के महीनों में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है। टीचर्स ने पाया कि स्टूडेंट्स का होमवर्क न सिर्फ समय पर आने लगा है, बल्कि भाषा, प्रेजेंटेशन और साफ-सफाई भी पहले से बेहतर हो गई है। शुरू में यह मेहनत का नतीजा माना गया, लेकिन गहराई से जांच करने पर पता चला कि इस बदलाव के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बड़ी भूमिका है।
आज मुफ्त AI टूल्स आसानी से उपलब्ध हैं। बच्चे इनकी मदद से गणित के सवाल हल कर रहे हैं, लंबे निबंध लिख रहे हैं और प्रोजेक्ट्स तैयार कर रहे हैं। कई मामलों में स्टूडेंट्स सिर्फ सवाल डालते हैं और कुछ सेकंड में पूरा जवाब मिल जाता है।
चेन्नई के केसी हाई इंटरनेशनल स्कूल की टीचर प्रीति श्रीधरन ने भी महसूस किया कि कुछ असाइनमेंट्स बच्चों की सामान्य क्षमता से कहीं बेहतर हैं। इसके बाद स्कूल ने ‘टर्निटिन’ जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया, जो अब AI से तैयार किए गए कंटेंट को भी पहचान सकता है। इससे नकल पकड़ना आसान हो गया।
हालांकि, कुछ स्टूडेंट्स AI से मिले जवाबों को बदलकर या पैराफ्रेजिंग टूल्स का इस्तेमाल कर नकल करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों में टीचर्स के लिए नकल पकड़ना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
खास ट्रेनिंग प्रोग्राम से टीचर्स तैयार
आईआईटी मद्रास ने शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए हैं। इसमें उन्हें सिखाया जा रहा है कि AI को दुश्मन नहीं, बल्कि मददगार के रूप में कैसे इस्तेमाल किया जाए। शिक्षकों को बताया जा रहा है कि AI से पढ़ाई को आसान बनाना और नकल को पकड़ना दोनों संभव हैं।
एक्सपर्ट्स का सुझाव
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब सिर्फ कॉपी-पेस्ट चेक करना पर्याप्त नहीं होगा। असाइनमेंट्स को ज्यादा क्रिएटिव और अनुभव आधारित बनाना होगा। उदाहरण के लिए, सिर्फ “इस विषय पर निबंध लिखिए” की जगह “इस विषय को अपने आसपास के उदाहरणों से समझाइए” जैसे सवाल पूछने चाहिए। इससे बच्चे खुद सोचेंगे और AI पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेंगे।

