
RBI Financial Stability Report:
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत ग्रोथ पथ पर बने रहने की संभावना है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित महंगाई और संतुलित मैक्रो-इकोनॉमिक नीतियां इस मजबूती का आधार बनी हुई हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि देश की घरेलू वित्तीय प्रणाली स्थिर और सुदृढ़ बनी हुई है।
आरबीआई के अनुसार, अनुकूल वित्तीय हालात, मजबूत बैलेंस शीट और बाजारों में अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव ने इस मजबूती को समर्थन दिया है। हालांकि, वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं निकट भविष्य में जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसके बावजूद, आरबीआई के दबाव परीक्षण (Stress Tests) दर्शाते हैं कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बैंक संभावित नुकसान सहने में सक्षम हैं और उनकी पूंजी नियामकीय न्यूनतम स्तर से काफी ऊपर बनी रहेगी।
केंद्रीय बैंक ने यह भी बताया कि म्यूचुअल फंड कंपनियां, समाशोधन निगम, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) और बीमा क्षेत्र पर्याप्त पूंजी, स्थिर आय और बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता के चलते मजबूत स्थिति में हैं। यह आकलन वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC) की उप-समिति के समग्र मूल्यांकन को दर्शाता है, जो भारतीय वित्तीय प्रणाली की मजबूती की पुष्टि करता है।
हालांकि, आरबीआई ने छोटी राशि के ऋण देने वाले संस्थानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ‘बैंकिंग में रुझान और प्रगति 2024-25’ रिपोर्ट में कहा गया है कि माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में हालिया तिमाहियों के दौरान चुनौतियां बढ़ी हैं, जिसकी प्रमुख वजह उधारकर्ताओं पर बढ़ता कर्ज बोझ है। खासतौर पर कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों में ऋण वितरण की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है।
आरबीआई ने स्पष्ट किया कि भले ही उद्योग स्तर पर सुधार के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन आगे चलकर परिसंपत्ति गुणवत्ता पर दबाव की आशंका बनी हुई है। ऐसे में नियामकीय संस्थाओं को माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में सतर्क ऋण वितरण और मजबूत जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी।

