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Wednesday, February 11, 2026
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बिहार में टीचर्स को पहले किस तारीख पर मिलती थी सैलरी, अब नियमों में क्यों हुआ बदलाव?

बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल खर्च सब कुछ प्रभावित होता था. देरी की सबसे बड़ी वजह कागजी प्रक्रिया में गड़बड़ी, इनकंप्लीट एब्सेंस रिपोर्ट और बैंक को समय पर सलाह न जाना था.

बिहार में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अक्सर अपनी सैलरी मिलने में देरी का सामना करना पड़ता था. कई बार दो-दो हफ्ते तक सैलरी नहीं आता था, जिससे घर-खर्च चलाना मुश्किल हो जाता था. परिवार की जरूरतें, बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल खर्च सब कुछ प्रभावित होता था. देरी की सबसे बड़ी वजह कागजी प्रक्रिया में गड़बड़ी, इनकंप्लीट एब्सेंस रिपोर्ट और बैंक को समय पर सलाह न जाना था. इसीलिए लंबे समय से शिक्षक संगठनों द्वारा सरकार से मांग की जा रही थी कि वेतन भुगतान की तारीख निश्चित की जाए, ताकि उन्हें हर महीने पता रहे कि किस दिन सैलरी मिलेगी. अब आखिरकार बिहार सरकार ने इस दिशा में बड़ा फैसला लिया है. नई एसओपी (Standard Operating Procedure) जारी करके यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रदेश के सभी शिक्षक नियमित, नियोजित, मदरसा, संस्कृत स्कूलों के शिक्षक और नाइट गार्ड को हर महीने पहली तारीख को ही वेतन मिलेगा.

पहले शिक्षकों को कब मिलती थी सैलरी?

पहले बिहार में सैलरी की कोई फिक्स तारीख नहीं थी. ज्यादातर मामलों में शिक्षक अपना वेतन महीने की 5 से 10 तारीख के बीच या कई बार इससे भी देर से प्राप्त करते थे. कई जिलों में वेतन 15 तारीख के बाद तक लटक जाता था. इसका कारण हर जिले में फाइलें कभी जल्दी तो कभी देर से ट्रेजरी तक पहुंचती थीं.

अब नियमों में क्यों हुआ बदलाव?

सरकार ने नियम बदलने के पीछे कई खास कारण बताए हैं. जैसे लंबे समय से शिक्षक समय पर वेतन न मिलने की शिकायत कर रहे थे. अब हर विभाग को तय तारीख पर अपना काम पूरा करना होगा. अगर हर महीने की पहली तारीख को राशि आ जाए, तो घर-खर्च समय से चल सकेगा. काम तय समय सीमा में होगा, इसलिए विभागीय लापरवाही भी कम होगी. पहले मदरसा, संस्कृत या नियोजित शिक्षकों का वेतन अक्सर ज्यादा देर से मिलता था. अब यह अंतर खत्म होगा.

अब नया नियम कैसे लागू होगा?

सरकार ने पूरी प्रक्रिया को तय कर दिया है कि किस दिन कौन-सा काम होगा. यह एसओपी सभी सरकारी और अनुदानित स्कूलों पर लागू है. सरकार ने तय किया है कि 20 से 25 तारीख शिक्षकों की उपस्थिति/अनुपस्थिति का विवरण जिला शिक्षा कार्यालय (DEO) को भेजेंगे. इसके बाद 25 से 26 तारीख डीपीओ (स्थापना) वेतन पत्रक बनाकर ट्रेजरी को भेज देगा फिर 30 तारीख को ट्रेजरी अधिकारी वेतन को मंजूरी देंगे. वहीं बीच में 26 से 29 तारीख तक जिला शिक्षा कार्यालय बैंक को सभी जरूरी डाटा देता है. यह काम 30 तारीख से पहले पूरा हो जाना चाहिए. इसके बाद 1 तारीख को जैसे ही महीना शुरू होगा, पहली तारीख को ही पैसा बैंक खातों में पहुंच जाएगा.

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