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Sunday, February 1, 2026
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Punjabi Cremation Rituals: पंजाबियों में अंतिम संस्कार कैसे होता है, और हिंदू रीति-रिवाजों से कितना अलग है?

Dharmendra Death News: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. उनके जाने से देशभर में शोक की लहर है. पिछले कुछ समय से वे स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी था. धर्मेंद्र पंजाबी मूल के थे, ऐसे में उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएं भी पारंपरिक पंजाबी-सिख रीति-रिवाजों के अनुसार की जा रही हैं, जो कई मायनों में हिंदू संस्कारों से अलग मानी जाती हैं.

पंजाबियों, विशेषकर सिख समुदाय में अंतिम संस्कार एक आध्यात्मिक, गरिमामयी और पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जाने वाला संस्कार है. मृत्यु के बाद सबसे पहले शव को सम्मानपूर्वक स्नान कराया जाता है और उसे पांच ककार—केश, कंघा, कड़ा, कृपाण और कच्छा—के साथ सजाया जाता है. इसके बाद गुरुद्वारे में ‘अरदास’, ‘जपजी साहिब’ और ‘कीर्तन सोहिला’ का पाठ किया जाता है. समुदाय और परिवार के लोग मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं.

अर्थी यात्रा के दौरान लोग ‘वाहेगुरु’ का जाप करते हुए शव के पीछे-पीछे चलते हैं, जिससे वातावरण में शांति और दृढ़ता बनी रहती है. सिख परंपरा में महिलाएं भी अंतिम यात्रा में समान रूप से शामिल हो सकती हैं. श्मशान घाट पर दाह संस्कार किया जाता है और माना जाता है कि आत्मा ईश्वर में विलीन हो जाती है.

दाह संस्कार के बाद परिवार 10 दिनों तक पाठ और कीर्तन करता है. इस अवधि में घर में गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ या नियमित पाठ चलता रहता है. दसवें दिन ‘भोग’ डाला जाता है, जो संस्कारों की पूर्णता का प्रतीक है. अस्थियों का विसर्जन भी सादगी और पवित्रता के साथ किसी बहती नदी में किया जाता है.

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