रक्षा मंत्रालय के शेयर में वृद्धि: एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि इस ऑर्डर में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रोनिक कंट्रोल सिस्टम का नाम थर्मल इमेजिंग फायर कंट्रोल सिस्टम (TIFCS) है। यह ऑर्डर यूनिट ऑप्टो इलेक्ट्रिक फैक्ट्री, देहरादून से मिला है।

रक्षा मंत्रालय के शेयरों में हमेशा जोखिम बना रहता है, लेकिन कई बार अचानक उसके उछाल से इंवेस्टर्स की चांदी हो जाती है। आज जिस शेयर की चर्चा हो रही है, वह है पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजी। कंपनी के शेयर में तेज़ी उस समय आई जब इसे रक्षा मंत्रालय की एक यूनिट ऑप्टो इलेक्ट्रोनिक्स फैक्ट्री से करीब 26 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऑर्डर मिला। इस खबर के बाद पारस का शेयर रॉकेट की तरह भागा।
क्यों रॉकेट बना शेयर?
एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने जारी किया कि यह आदेश थर्मल इमेजिंग फायर कंट्रोल सिस्टम (TIFCS) में उपयोग होने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम का है। इस आदेश को रक्षा मंत्रालय की यूनिट ऑप्टो इलेक्ट्रिक फैक्ट्री, देहरादून से मिला है, जिसे दिसंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच पूरा किया जाना है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह आदेश घरेलू संस्था से मिला है और संबंधित पार्टी लेन-देन के दायरे में नहीं आता।
इस आदेश की घोषणा के बाद 12 सितंबर को पारस के शेयर में लगभग 5 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई और यह ₹694 के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया.
पहले तिमाही में 15 करोड़ का लाभ मिला।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो पारस डिफेंस ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 15 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग समान रहा. हालांकि, कंपनी के राजस्व में सालाना आधार पर करीब 11.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 93.2 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
पारस डिफेंस के शेयर की परफॉर्मेंस पर नज़र डालें तो पिछले एक साल में यह लगभग 18 प्रतिशत ऊपर गया है. वहीं, पिछले छह महीनों में निवेशकों को 52 प्रतिशत से भी ज्यादा का रिटर्न मिला है.

