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Thursday, February 5, 2026
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पाकिस्तान और चीन के शेयर बाजारों के सामने भारत का प्रदर्शन बढ़ गया है, क्या यह किसी तरह से खेल को खराब कर रहा है?

भारतीय शेयर बाजार का पिछले साल का प्रदर्शन काफी खराब रहा है जिसमें दूसरे कई बाजारों के मुकाबले 2 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।भारतीय शेयर बाजार में जीएसटी दरों में सुधार के बाद सरकार ने गए फैसलों की स्वागत की गई है, जिससे भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआती कारोबार में तेजी की उम्मीद दिखाई है। लेकिन यह दुखद है कि पिछले साल दूसरे बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन खराब रहा है और इसमें 2 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। यह स्थिति पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों के मुकाबले और भी गंभीर है क्योंकि वहां के शेयर बाजारों ने दोहरे अंक में बढ़त हासिल की है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन किया है। जीएसटी दरों में कटौती के ऐलान के बाद सेंसेक्स में 4 सितंबर को 1 प्रतिशत तक की उछाल आई, लेकिन पिछले साल में सेंसेक्स लगातार घाटे में रहा है। दुनिया भर के लगभग 20 शेयर बाजारों में भारत का पायदान सबसे निचला क्यों है, यह एक बड़ा सवाल है।

एशियाई बाजारों में गजब का उछाल 

पिछले एक साल में पाकिस्तानी शेयर बाजार के केएसई 100 इंडेक्स ने 95 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है, जिससे निवेशकों को बड़ा मुनाफा हुआ है। ब्लूमबर्ग की डेटा के अनुसार, केएसई 100 इंडेक्स 94.44 प्रतिशत ऊपर है। इस बीच, चीन के शंघाई इंडेक्स ने भी पिछले एक साल में 35 प्रतिशत तक वृद्धि की है। कनाडा का टीएसएक्स कंपोजिट 25 प्रतिशत तक बढ़ा है। इसी दौरान, जापान का निक्केई 15 प्रतिशत, ब्रिटेन का एफटीएसई इंडेक्स 11 प्रतिशत और ब्राजील का बोवेस्पा इंडेक्स 3 प्रतिशत तक उछला है। अमेरिकी शेयर बाजार ने भी 1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज़ की है।

क्यों भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट? 

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार के खराब प्रदर्शन के लिए तीन मुख्य कारण हैं। इनमें सबसे अहम कारण अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव है। पिछले दो-तीन महीनों में भारत में कंपनियों की आय में कमी देखी गई है जिसके कारण विदेशी निवेशकों ने कई भारतीय शेयर बेच दिए हैं। दूसरा कारण यह है कि अमेरिका में टैरिफ युद्ध के कारण मामला और पेंचीदा हो गया है। द मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और सीईओ जी चोक्कालिंगम ने बताया, “टैरिफ युद्ध का पहले चरण सभी बाजारों को प्रभावित किया, लेकिन दूसरे चरण में इसका प्रभाव सबसे अधिक भारत पर पड़ा।”

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