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Thursday, February 5, 2026
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अब इस्तेमाल किए गए खाने के तेल से उड़ेगा विमान, इंडियन ऑयल को मिली बड़ी मंज़ूरी

एविएशन फ्यूल: यह मान्यता ISCC CORSIA (ICAO) की ओर से दी गई है। आईओसी के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी ने बताया कि कंपनी की उम्मीद है कि पानीपत रिफाइनरी से इस साल दिसंबर तक खाने के इस्तेमाल किए हुए तेल से विमान के ईंधन का उत्पादन शुरू हो जाएगा.

IOC ने एविएशन ईंधन शुरू करने का निर्णय लिया है: आमतौर पर लोग अधिकतर बेकार या पुराना खाना तेल फेंक देते हैं। परंतु अब यह तेल हवाई जहाजों के उड़ान संचालन में प्रयोग होगा। भारत की सबसे बड़ी रिफाइनिंग और ईंधन विपणन कंपनी IOC को इसकी अनुमति प्राप्त हो गई है। हरियाणा के पानीपत स्थित रिफाइनरी को सस्टेनेबल एविएशन ईंधन (SAF) बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र मिला है। इस प्रकार का प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाली IOC भारत की पहली कंपनी बन गई है। यह मान्यता ISCC CORSIA (ICAO) द्वारा प्रदत्त है। IOC के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी ने बताया कि कंपनी की उम्मीद है कि पानीपत रिफाइनरी से इस साल दिसंबर तक खाने के इस्तेमाल किए हुए तेल से विमान का ईंधन उत्पादन शुरू हो जाएगा।

कितना ईंधन बनेगा?

भारतीय ऑयल के अनुमान है कि इस साल के अंत तक 35,000 टन प्रतिवर्ष की क्षमता से विमान ईंधन बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए खराब तेल से भरपूर हो जाएगी. इसके लिए बड़े होटल, रेस्तरां और हल्दीराम जैसे प्रमुख फूड चेन से खराब तेल इकट्ठा किया जाएगा. यह वही तेल है जिसे एक बार तलने-पकाने के बाद दोबारा उपयोग में नहीं लाया जाता है. आईओसी चेयरमैन का कहना है कि देश में इस्तेमाल होने वाला तेल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. असली चुनौती यह है कि यह तेल छोटे-छोटे शहरों और कस्बों से इकट्ठा किया जाए. इसके लिए विशेष सिस्टम विकसित किया जा रहा है.

सस्टेनेबल फ्यूल क्या है?

सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) एक पर्यावरण-संवेदी विकल्प है, जो पारंपरिक जेट फ्यूल के मुकाबले काफी कम कार्बन उत्सर्जन करता है। यह तेल के बजाय खाद्य मिल, कृषि अवशेष और अन्य बायो-वेस्ट से बनाया जाता है। इसके उपयोग से विमानन उद्योग का कार्बन प्रदूषण कम होगा। पारंपरिक एविएशन टर्बाइन फ्यूल में पंचास प्रतिशत तक सस्टेनेबल फ्यूल मिलाया जा सकता है। 2027 तक भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए विमानों में 1 प्रतिशत सस्टेनेबल फ्यूल का मिश्रण अनिवार्य कर दिया है, ताकि एविएशन क्षेत्र को अधिक सुस्त और हरित बनाया जा सके। साहनी कहते हैं कि यूरोप ने पहले ही सस्टेनेबल एयर फ्यूल को अनिवार्य कर दिया है। ऐसे में इंडियन ऑयल के सस्टेनेबल फ्यूल का यूरोपीय एयरलाइंस संभावित पहला खरीदार हो सकती है, जब वे भारत में उड़ान भरेंगी।

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